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किस्मत


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आभार गुगल


अधेरे स्याह थे उस दिन
सितारों को किसी ने आजमाया था
किस्मत की बाज़ी पे
 कोई गोटी सही नहीं थी
उस दिन वो ख़ाली हाथ घर आया था

कहने - सुनने वाले लाखो थे
जो उसे बचाता वो सितारा ना था
ना उम्मीद सा वो अकेला शक्स नहीं था
शमा को जला रोशनी  करे
यही उसकी फितरत में कभी नहीं था

टूट कर मजबूर हो रो दे उसे मंजूर नहीं था
दो निवालो के लिए बिक जाए
फिर ना किसी को वो नज़र आए
लाख चाहा मगर उसका दिल माना नहीं था
आराधना राय अरु


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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला