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Showing posts from July 16, 2015

सवालात

एहतमाद के काबिल ना थे उनका ख्याल किए
 दिलों में नश्तर चुभा के सौ  सवालात किए

तेरी पनाह में झुक कर सज़दे  हज़ार किए
उससे जीने के वादे  हमने हज़ार किए

वफ़ा कि बातें  हमारी ज़ानिब से  बार-बार किए
क़त्ल कि रात हर लम्हा हमारा इंतज़ार किए

उसी के नाम का सदका हज़ार बार किए
उसी को खुदा मान कर सौ- सौ काम किए

अज़ीम ग़ैरत  रही  जिन्होंने  सवालात किए
अज़ीब बात है "अरु " तुझसे हर सवाल किए   आराधना राय


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