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Showing posts from September 13, 2015

छोटी सी बात

साभार गूगल
दिल ही समझे दिल की बात। .....






                                                     छोटी सी बात  (  लधु -कथा  )

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कोई बात नहीं हुई थी , फिर भी लग रहा था की कोई  शीत युद्धचल रहा है। कनक लगभग अपना सामान बाँध चुकी थी , उसने अनमने ढंग से सुकेश से पूछा " तुम्हारा सामान बांध दू या नहीं" ।

"नहीं " अख़बार एक तरफ फेक कर उसने दो टूक उत्तर दिया।  कनक को जैसे मालूम था , की सुकेश क्यों उस के मायके उस के साथ नहीं जा रहा बोलना बहुत कुछ चाहती थी मगर बोली नहीं, मन मसोस कर सामान लगाती रही। पता नहीं सुकेश को साथ न देख क्या बोले माँ बाबूजी , मन ही मन वो भयभीत होती रही।
 बड़ी देर तक खुद ही अपने माँ बाबूजी की कल्पना कर प्रश्नों के  उत्तर देती रही।

टिकट रखने से लेकर , घर का  बिखरा सामान लगाने तक , कनक खुद को ही कोस रही थी ,और करो प्रेम - विवाह कनक ,ऐसा ही होगा तुम्हारे साथ ,अब माँ - बाबूजी को दोष देती हुई ,मायके थोड़ी ही जा सकती थी। विवाह तो किया अपन ही मन से न , …