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Showing posts from May 2, 2015

अदा मुस्कुराने की

दूर से सुनते है आहट तेरे ही  आने की  ज़िंदगी कि ये भी अदा है मुस्कुराने की 
अब भरम का भी भरम  नहीं मुझको  तू मेरा अक्स है ये बात नहीं बताने की 
काँटों पे चलना है और जीना है मुझको  मुझे पता है क्या चाल है इस ज़माने की 
तुम करोगे जब भी बात इस ज़माने की  हम भी आग़ाज़ करेंगे किसी फ़साने की  कॉपी राइट @ आराधना राय 

ढूंढते हैं तेरे निशां

साभार गुगल इमेज़  ======================= ढूंढते  हैं तेरे निशां राह - राह में  जानती हूँ सीधे नहीं मेरे ये रास्ते 
उम्मीद कि किरणे अभी  पास में        कुहासे भी मिले कभी  मुझे रात में  भूली -भटके ही  ज़िंदगी से मिली में  आंगन बीच दिया सा बनके  जली में
आराधना राय