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Showing posts from May 3, 2015

प्रीत का प्याला

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साधु हुआ ये जग बेगाना
मुरली के संग मीरा नाची
राधा संग जैसे हो कान्हा
प्रेम कि रीत बड़ी निराली
पी गई विष का भी प्याला
लोक -लाज़ तज कर हारी
बन गई  प्रीत कि ज्योति
हार गई अरु ये सब जीवन
कह गई ये जग भी दीवाना  कॉपी राइट @आराधना राय





राहत -ए -वस्ल

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जहा से उम्मीद राहत  की कभी पाई है
वही जा कर ही ये चोट भी हमें क्यू आई है 
तेरे झूठ से भी हमें कभी परहेज़ जब ना था
क्यू  सच से अब इस जान पर बन सी आई है

उन्हें ही गवारा नहीं किया जब ये साथ मेरा
हाल -ए -दिल किस से कहे जो है ये तन्हाई है

हमने हर हाल में चलने की फिर कसम खाई है
 ना जाने क्यू ये ज़िन्दगी हम से ही शरमाई है

कॉपी राइट @आराधना राय