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Showing posts from August 19, 2015

एहसास

मेरे एहसास के हिस्से है
जो बिखर गए है नसीबों की तरह

समेटे उनको यूँ क्या
जो रह गए है मेरे ज़ज़्बातो की तरह

तेरी बातों से दुनियाँ  दीवानी होगी
मेरी तो दिल में बसी है धड़कनों की तरह

नज़र झुका के बैठें है राहों में
कभी तो गुज़रोगे तुम इन राहों पे ख़ुदा की तरह

ये मुकाम मेरा न तुम्हारा होगा
 'अरु  '  अर्श की बात वही है इस ज़मी की तरह
आराधना राय 'अरु '


میرے احساس کے حصے ہے جو بکھر گئے نصیبوں کی طرح
سمیٹے ان یوں کیا جو رہ گئے میرے ذذباتو کی طرح
تیری باتوں سے دنیا دیوانی ہوگی میری تو دل میں بسی ہے دھڑكنو کی طرح
نظر جھکا کے بیٹھیں ہے راہوں میں کبھی تو گذروگے تم ان راہوں پہ خدا کی طرح
یہ مقام میرا نہ تمہارا ہوگا   'ار' عرش کی بات وہی ہے اس ذمي کی طرح ارادھنا رائے 'ار'




बसेरा

साभार गूगल। । ............. 
बसेरा
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बारिशों में घर की छत टपकती रही
साथ मेरे यूँ पूरा समंदर रहा आशिया प्यार का था बताते भी क्या
मेरे घर में राहतों का बसेरा रहा ना मालूम कैसे वो हालत थे
जिन मैं आदमी 'अरु' मर के भी जी गया आराधना राय "अरु "
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