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Showing posts from June 29, 2015

दे दिए

ज़िंदगी के दीये यू ही जला दिए 
राह आसान ना थी रास्तों में घर बना दिए। 

तेरी बात को गले यू ही लगा लिए
कौन था जिसने हर बार गहरे ज़ख़्म लगा दिए 

करूँ क्या उन से में यू ही तौबा
जिन्होंने दूसरों के घर यू ही सरेआम जला दिए 

जाने  तुम क्यों ना सम्हल पाए 
अपनी तमन्नाओं के लिए  दूसरों के दामन जला दिए  

ज़माने ने  सौ दाग़ मुझे ही दिए
कई चराग़ जलने से पहले ही  खुद खुदा बन बुझा दिए  

हालत पर बात यू ही बना दिए
वक़्त ने मेरी आँख में "अरु"  आँसू यू ही क्यों दे दिए 

आराधना राय