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Showing posts from July 10, 2015

वज़ह

ज़िंदगी यू ही खुद तू  बर्बाद  है
आदतन जुल्म का शिकार  है

बात तुझ से यू ही किये जाते है
बे वज़ह हम भी जीए ही जाते है

कोई तुम सा  यहाँ नही  होता है
वक़्त जब मेहरबान यू ही होता है

काम कुछ भी नहीं तेरे यू  आता है
आदमी जब नाकाम हुआ जाता है

कोई अजब सी बात रूह पे तारि है
ए "अरु" सफर तेरा भी ये ज़ारी है  आराधना राय
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