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Showing posts from April 28, 2015

भगवान परेशान हुआ

भूख, तृष्णा ,प्यास,जीवन बना हाहाकार
मृत्यु से रचा बसा हुआ है ये सकल संसार

रुष्ट है भगवान या सृष्टि का अंत हुआ है
कलरव मचा कैसा ये कौन सा धुँआ उठा है

मन नहीं तन भी यहाँ पर व्यापार हुआ है
जीने का कौन जाने साज़ो समान हुआ है

हर कोई इस दौर में क्यू भगवान हुआ है
देख कर भगवान भी अब परेशान हुआ है।
आराधना राय

प्रेम

साभार गुगल इमेज़

बनता  नहीं प्रेम कॉपी किताबों कि तरह
कोई  रहता मौन मन में सितारे कि तरह  
जहां खिली में बन के हरसिंगार कि तरह  वही सर्वस्व लुटाया था धरा कि ही तरह 
क्यों बुझते है अनबुझ सी  पहेली कि तरह  जब मैं ना थी किसी कि भी सहेली कि तरह 
मान का कहां जब बिके समान कि ही तरह
कहे कैसे जब रहे हम बन के सज़ा कि तरह

आराधना राय