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Showing posts from May 6, 2015

जान पर बन आई है

जाने क्यों फिर जान पर बन ये आई है
 कोई पहचान है या अज़नबी कोई आई है

कहती है सालों से मेरा उसका रिश्ता है
फिर हाय -तौबा सी क्यों उसने मचाई है

 किस बात का शिकवा है बताने वो आई है
साँस लेते है तो उफ सी  निकल ही आई है

ज़िन्दगी बहाने से फिर पूछने क्यू आई है
दिल के साज़ो -सामान से बहलाने आई है
आराधना राय