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एहसास

मेरे एहसास के हिस्से है
जो बिखर गए है नसीबों की तरह

समेटे उनको यूँ क्या
जो रह गए है मेरे ज़ज़्बातो की तरह

तेरी बातों से दुनियाँ  दीवानी होगी
मेरी तो दिल में बसी है धड़कनों की तरह

नज़र झुका के बैठें है राहों में
कभी तो गुज़रोगे तुम इन राहों पे ख़ुदा की तरह

ये मुकाम मेरा न तुम्हारा होगा
 'अरु  '  अर्श की बात वही है इस ज़मी की तरह
आराधना राय 'अरु '


میرے احساس کے حصے ہے
جو بکھر گئے نصیبوں کی طرح

سمیٹے ان یوں کیا
جو رہ گئے میرے ذذباتو کی طرح

تیری باتوں سے دنیا دیوانی ہوگی
میری تو دل میں بسی ہے دھڑكنو کی طرح

نظر جھکا کے بیٹھیں ہے راہوں میں
کبھی تو گذروگے تم ان راہوں پہ خدا کی طرح

یہ مقام میرا نہ تمہارا ہوگا
  'ار' عرش کی بات وہی ہے اس ذمي کی طرح
ارادھنا رائے 'ار'





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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

अच्छा था

ज़िन्दगी तेरे बिना जी लेते तो अच्छा था
दामन आंसुओं में भिगो लेते तो अच्छा था
सुना कर हाल दिल का रात भर रोये
तुम से राब्ता न होता दिल का तो अच्छा था
दिल धड़कता रहा मगर जुबा चुप थी
मेरे इकरार को इंकार समझ लेते तो अच्छा था
ख़ुशी की महफिले कम पड़ी गम भुलाने में
हमें तुम याद न आते अरु तो अच्छा था

ग़ज़ल

लगी थी तोमहते उस पर जमाने में
एक मुद्दत लगी उसे घर लौट के आने में

हम मशगुल थे घर दिया ज़लाने में
लग गई आग सारे जमाने में

लगेगी सदिया रूठो को मानने में
अजब सी बात है ये दिल के फसाने में

उम्र गुजरी है एक एक पैसा कमाने में
मिट्टी से खुद घर अपना बनाने में

आराधना राय