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कतरा




ज़िंदगी कतरा कतरा ही तय कि हमने
ख़ुशी से ज़्यादा ग़मो को ही जीया हमने

वक़्त का खुद इंतज़ार यू ही किया हमने
रुखसती पर अपना  मातम किया हमने

जीने के बहाने यू ही हज़ार क्यू दिए हमने
ज़िंदगी को नए अल्फ़ाज़ क्यू दिए हमने

चाँद कि चाँदनी को ना ख़फा किया हमने
"अरु"  अश्क़ से ख़ुद  निबाह किया हमने
आराधना राय


copyright : Rai Aradhana ©


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महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 
कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला