Skip to main content

मुमकिन नहीं है


Image result for image

तुम्हे भूल जाऊँ मुमकिन नहीं है
चलो इस जहां को ही भूल जाऊँ

फसाने हजारों मिलेगे तुम्हे भी
हमारी गली से तूम राब्ता रखना

भूल गर जाऊँ नगमे तुम्हारे हमारे
चाँद को तूम दो पल याद कर लेना

वफ़ा कीना पूछे, पूछे गम ए दिल
मेरा मोहताज़ तू कब हो गया था

वो मायूसी तेरी कामयाबी किसी की
दिल इतना बेईमान कब हो गया था
Post a Comment

Popular posts from this blog

नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला