Skip to main content

नग्मा प्यार का





साभार गुगल

फूलों से सुना नग्मा प्यार का
हाल सुनाया सबा ने इज़हार का
---------------------------------------------------------------------------------
लम्हा दर लम्हा गुज़रा तूफान का
दिलों के बीच रिश्ता क्या इकरार का
---------------------------------------------------------------------------------
शज़र पे बरसा आफताब आग का
कितना तवील था मौसम इंतजार का
---------------------------------------------------------------------------------
सफर सुहाना रहा घटा से मेहताब का
कली ने सीखा तराना दिल के क़रार का
---------------------------------------------------------------------------------
जलता रहा दिया मेरी टूटी दीवार का
रात भर अश्क बहा उसके इंकार का
---------------------------------------------------------------------------------
खिज़ा ने किया है रुख ठंडी हवाओं का
नीद में चुनते रहे ख्वाब इसरार का
---------------------------------------------------------------------------------
वो बनाता रहा बहाना इक्लाक़ का
रास ना आया "अरु" मौसम खार का

आराधना राय "अरु"

Post a Comment

Popular posts from this blog

नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला