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नज़्म जिंदगी


साभार गुगल





नज़्म


जिंदगी मेरी ग़ज़ल हुई
तुझसे बिछडने के बाद

रात कि मेरे सहर न हुई
चाँद निकलने के बाद

दिल ने सिर्फ तेरी सुनी
अश्क बार होने के बाद

मर्ज़ मेरा लाइलाज रहा
दिले- बर्बाद होने के बाद

आँच दिल को जलाती रही
दीप की लो बन जाने के बाद

जिंदगी मुझे म्यसर ना हुई
तिरे चले जाने के बाद

सुनी अनसुनी  सब रह गई 
"अरु"  शबे जिंदगी चले  के बाद

आराधना राय "अरु"






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महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 

नज़्म

रोज़ मिलती है सरे शाम बहाना लेकर
जेसे अँधेरे में उजालों का फसाना लेकर

चाँद के पास से चाँदनी का खजाना लेकर
मुझको अनमोल सा एक नजराना देकर

मेरा दर दर नहीं कुछ नहीं है क्या उसका
जब भी मिलती है यही एक उलहना लेकर

रात भर कितने आबशार बहा के जाती है
पर वो जाती है तो किस्मत का बहाना लेकर -
आराधना राय

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला