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दोस्तो देख लो


करम कैसा ये उल्फतो का अजब है दोस्तो देख लो
पड़े हैं  उनकी  रहमतो पर गज़ब  दोस्तो देख लो

खतावार  हुआ खुद  गम का  शिकार रास्ता देख लो
रहम यहाँ किस के दिल के करीब  दोस्तों देख लो

कड़ी दरवाजे की बंद कर के दुनियाँ  से वास्ता देख लो
आँख बंद कर के सहरा -ओं के सराब  दोस्तों देख लो

बड़े अदब का क़ायदा रिवायत उनकी कायदा देख लो
हर इक पल  तराशा उन का हिसाब  दोस्तों देख लो

आराधना राय "अरु"
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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला