Skip to main content

विश्व- मैत्री


-------------------------------------------
स्रृष्टि , जब भक्ति बन गई
जगत जलचर सभी शुभ हो जायेंगे 
राम कि अयोध्या , जीवन हो जाएगे
श्याम और राधा का प्रेम यही पायेगे
विश्व जब सद भावना के लिए
विश्व -बंधुत्व दिवस बन जाएगा
कोई एक दूसरे से अलग कैसे रह पायेगा
गायन , वादन , नृत्य से
कला देवी शारदा कोजब पाएगे
राम -राज्य बन साकेत
सा जीवन यही हो जायेगा
प्रेम कि धारा ,सूर्ये कि शक्ति भी आएगी
जब जीवन तू स्वयं शिव सार्थक हो जायेगा
तब पार्वती को शिव राधा को कृष्ण पाकर
गणेशं कि मंगल कामना से
हर घर जगमगाएगा
उस दिन ईश्वर तू धरती
पर उत्तर आएगा
जीवन उन्नत शिखर हो जायेगा।
पूर्ति स्वयम ईश्वर वसुंधरा का हो जाएगा
स्त्री- पुरुष से ,सृष्टि करेगी,अपना श्रिंगार
जीवन निरंतर धीरे धीरे आएगा
,सुर का सुरेश्वर ,महेश्वरि भी अपनाएगा
"अरु " का जीवन सुरभित हो जाएगा
आराधना राय
Post a Comment

Popular posts from this blog

नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




नज्म

नज्म
हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का
खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का
कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का
मेरे इकरार पर उनका इसरार होगा जब तभी तो बात बनेगी रिश्ता निभाने का
आराधना राय

नज्म

उम्र भर के निशा ढूंढते है
ऐ - सहर हम तुझे ढूंढते है तू सितारा है आसमा का 
दर -ब -डर हम तुझे ढूंढते है तू है सागर में भी हु नदिया
तेरे कदमो में पनाह ढूंढते है राते कितनी भी हो गई काली
एक उजाले को हम ढूंढते है ---------------अरु