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विश्व- मैत्री


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स्रृष्टि , जब भक्ति बन गई
जगत जलचर सभी शुभ हो जायेंगे 
राम कि अयोध्या , जीवन हो जाएगे
श्याम और राधा का प्रेम यही पायेगे
विश्व जब सद भावना के लिए
विश्व -बंधुत्व दिवस बन जाएगा
कोई एक दूसरे से अलग कैसे रह पायेगा
गायन , वादन , नृत्य से
कला देवी शारदा कोजब पाएगे
राम -राज्य बन साकेत
सा जीवन यही हो जायेगा
प्रेम कि धारा ,सूर्ये कि शक्ति भी आएगी
जब जीवन तू स्वयं शिव सार्थक हो जायेगा
तब पार्वती को शिव राधा को कृष्ण पाकर
गणेशं कि मंगल कामना से
हर घर जगमगाएगा
उस दिन ईश्वर तू धरती
पर उत्तर आएगा
जीवन उन्नत शिखर हो जायेगा।
पूर्ति स्वयम ईश्वर वसुंधरा का हो जाएगा
स्त्री- पुरुष से ,सृष्टि करेगी,अपना श्रिंगार
जीवन निरंतर धीरे धीरे आएगा
,सुर का सुरेश्वर ,महेश्वरि भी अपनाएगा
"अरु " का जीवन सुरभित हो जाएगा
आराधना राय
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महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 

नज़्म

रोज़ मिलती है सरे शाम बहाना लेकर
जेसे अँधेरे में उजालों का फसाना लेकर

चाँद के पास से चाँदनी का खजाना लेकर
मुझको अनमोल सा एक नजराना देकर

मेरा दर दर नहीं कुछ नहीं है क्या उसका
जब भी मिलती है यही एक उलहना लेकर

रात भर कितने आबशार बहा के जाती है
पर वो जाती है तो किस्मत का बहाना लेकर -
आराधना राय

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला