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पनाहों में होता

साभार गूगल


27-12-2015
सज़दा गर तेरी पनाहों में होता 
असर कुछ इन दुआओं में होता
मेरा घर रोशनी से आबाद होता
इमान गर तेरी वफाओं में होता
मंदिर ना मस्जिद ना खाक होता
खुदा गर तेरी इन शिराओं में होता
दिल का मकान यह खाली ना होता
तेरा नाम गर इन सितारों में होता
चाँद रात उन का हसीं दीदार होता
चेहरा गर उनका ना हिज़ाबों में होता
बसेरा अपना तेरे गाँव में "अरु" होता
पैगाम तेरा गर इन फिजाओं में होता
आराधना राय "अरु"
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महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 

नज़्म

रोज़ मिलती है सरे शाम बहाना लेकर
जेसे अँधेरे में उजालों का फसाना लेकर

चाँद के पास से चाँदनी का खजाना लेकर
मुझको अनमोल सा एक नजराना देकर

मेरा दर दर नहीं कुछ नहीं है क्या उसका
जब भी मिलती है यही एक उलहना लेकर

रात भर कितने आबशार बहा के जाती है
पर वो जाती है तो किस्मत का बहाना लेकर -
आराधना राय
कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है