Skip to main content

ख़्वाहिशें

Pastel Dreams wallpaper by Emerald-Depths





उन से मिलने की ख़्वाहिशें हज़ार की
दिल ने मिल कर साज़िशें हज़ार की
ना जाने कारवां किधर जा रहा था
सबने आरइशे हज़ार की
अपनी ही मस्ती में सब डूबे हुए थे
बस्तियों में रिहाइशें हज़ार की
साथी अजब से राह में मिल रहे थे
सबने सिफारिशें हज़ार की
सफर रास्तों के ना आसान होंगे
कहने को "अरु" ख़्वाहिशें हज़ार की آرادنا رائے ار
Post a Comment

Popular posts from this blog

नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला