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ख़्वाहिशें

Pastel Dreams wallpaper by Emerald-Depths





उन से मिलने की ख़्वाहिशें हज़ार की
दिल ने मिल कर साज़िशें हज़ार की
ना जाने कारवां किधर जा रहा था
सबने आरइशे हज़ार की
अपनी ही मस्ती में सब डूबे हुए थे
बस्तियों में रिहाइशें हज़ार की
साथी अजब से राह में मिल रहे थे
सबने सिफारिशें हज़ार की
सफर रास्तों के ना आसान होंगे
कहने को "अरु" ख़्वाहिशें हज़ार की آرادنا رائے ار
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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

अच्छा था

ज़िन्दगी तेरे बिना जी लेते तो अच्छा था
दामन आंसुओं में भिगो लेते तो अच्छा था
सुना कर हाल दिल का रात भर रोये
तुम से राब्ता न होता दिल का तो अच्छा था
दिल धड़कता रहा मगर जुबा चुप थी
मेरे इकरार को इंकार समझ लेते तो अच्छा था
ख़ुशी की महफिले कम पड़ी गम भुलाने में
हमें तुम याद न आते अरु तो अच्छा था

ग़ज़ल

लगी थी तोमहते उस पर जमाने में
एक मुद्दत लगी उसे घर लौट के आने में

हम मशगुल थे घर दिया ज़लाने में
लग गई आग सारे जमाने में

लगेगी सदिया रूठो को मानने में
अजब सी बात है ये दिल के फसाने में

उम्र गुजरी है एक एक पैसा कमाने में
मिट्टी से खुद घर अपना बनाने में

आराधना राय