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क्या बताए तुझे



क्या बताए तुझे 
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मेरी ज़िन्दगी के  
हालात तंग थे 
इसलिए मेरे रिश्तों 
कि मौत हो गई। 
ज़िंदगी में नाकाम रहे 
रिश्ते भी हम पे कुछ 
बोझ ही रहे। 
मेरी चादर  ही तंग थी 
लेना -देना ना कभी 
सलीक़े से आया हमें 
मुझ से मेरे रिश्तों को 
परेशानी यही थी ,
दिल कि दौलत की 
मेरे पास यू तो कमी 
नहीं थी। 
दुनियाँ का कारोबार 
जिस से चलें वो 
दौलत नहीं थी। 
ख़्वाब है उन कि 
क़ीमत  ही क्या है 
मेरी नाकामियों में
वो भी अब बिकते
नहीं कहीं।
क्या बताए तुझे
ज़िंदगी रिश्तों के
साथ ही नहीं  चल पाए
हम कभी।
आराधना राय  "अरु"
Aradhana ©    



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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

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बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
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तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला