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ज़ुबाँ




दर्द खुद एक ज़ुबाँ बन जाता  है
ख़लिश कि दास्ताँ कह जाता है

कोई तुम सा जो यू मिल गया है
कोई अब्र का टुकड़ा ही जुड़ गया है

मेरी पेशानी पे कुछ वो लिख गया है
ख्वाहिशों कि निशानी "अरु" दे गया है
आराधना राय "अरु"
 Rai Aradhana ©


(खलिश) Origin: Persian Khalish is an Urdu word, it means "prick, pain, anxiety, apprehension" 

हिंदी - दर्द , पीड़ा 

  पेशानी -   माथा , forehead.-
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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




नज्म

नज्म
हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का
खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का
कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का
मेरे इकरार पर उनका इसरार होगा जब तभी तो बात बनेगी रिश्ता निभाने का
आराधना राय
देख कर आए है दुनियाँ सारी
ना वो दर रहा ना वो घर रहा
आँधियों  का डर नहीं था धरोंदे को
मेरा दिल ही हादसों के नज़र रहा
तोड़ दी कमर मेरी गरीबी ने
मै जहां रहा  बे शज़र रहा
आ गए याद मुझे चहरे पुराने
उन्ही के नगर बे डगर रहा
अरु