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बात हुई



साभार गूगल

कौन जानें क्या कब ये बात हुई
तुझ से यूँ ही नहीं मुलाक़ात हुई

कहीं जब झूम के गाता है सावन
किसकी आँखों से ये बरसात हुई

तन पे बारिश कि कैसी छींट पड़ी
मन कि अपने आप से ये बात हुई

रंग कच्चे होते तो निकल जाते युहीं
ताउम्र ना निकले ये अज़ब बात हुई

अब के बरसात में हलचल ख़ास हुई
घर में "अरु" बिज़लियाँ मेहमान हुई
आराधना राय "अरु"
Rai Aradhana ©




































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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला