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ख्याल

                       

             ख्याल
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आज कल लोग बिना बात ही यू  बदनाम करते है
उसूलन हम भी उन्हें ही तो जा कर सलाम करते है

ये और बात है लोग इश्क़ कि  बात यू ही करते है
बिना बात के वो ही बस हर बार सवालात करते है

है बहुत मुश्किल उनको ही यू भी ये अब  समझाना
जो किसी के दिल का भी अब ख्याल ही नहीं रखते है

हमें  गम हो के ना हो अब यू ही हम दरकार रखते है
पशेमां क्यू हो उन से "अरु" समझ बरक़रार रखते है
आराधना राय

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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




नज्म

नज्म
हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का
खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का
कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का
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आराधना राय

नज्म

उम्र भर के निशा ढूंढते है
ऐ - सहर हम तुझे ढूंढते है तू सितारा है आसमा का 
दर -ब -डर हम तुझे ढूंढते है तू है सागर में भी हु नदिया
तेरे कदमो में पनाह ढूंढते है राते कितनी भी हो गई काली
एक उजाले को हम ढूंढते है ---------------अरु