Skip to main content

बहते धारे में

वक़्त के बहते धारे में
हालत अक़्सर बदल ही जाते है

एक बून्द है हम पानी की
अक्स बदल कर बहते ही जाना है


ख़ामोश हो चुके कहने वाले
जो थे ज़िन्दगी को ज़ुबान देने वाले

आज मेरा कल तेरा बहाना है
'अरु' ज़िन्दगी को किसने अभी जाना है
आराधना राय "अरु "
Rai Aradhana ©


وقت کے بہتے دھارے میں
حالت اقسر بدل ہی جاتے ہیں

ایک بوند ہے ہم پانی کی
عکس بدل کر بہتے ہی جانا ہے


خاموش ہو چکے کہنے والے
جو تھے زندگی کو زبان دینے والے

آج میرا کل تیرا بہانہ ہے
'ار' زندگی کو کس نے ابھی جانا ہے
ارادھنا رائے "ار"
Rai Aradhana ©

خراب
Google Translate for Business:Translator ToolkitWebsite TranslatorGlobal Market Finder
Turn off instant translationAbout Google TranslateMobileCommunityPrivacy & TermsHelpSend feedback
Post a Comment

Popular posts from this blog

कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

अच्छा था

ज़िन्दगी तेरे बिना जी लेते तो अच्छा था
दामन आंसुओं में भिगो लेते तो अच्छा था
सुना कर हाल दिल का रात भर रोये
तुम से राब्ता न होता दिल का तो अच्छा था
दिल धड़कता रहा मगर जुबा चुप थी
मेरे इकरार को इंकार समझ लेते तो अच्छा था
ख़ुशी की महफिले कम पड़ी गम भुलाने में
हमें तुम याद न आते अरु तो अच्छा था

ग़ज़ल

लगी थी तोमहते उस पर जमाने में
एक मुद्दत लगी उसे घर लौट के आने में

हम मशगुल थे घर दिया ज़लाने में
लग गई आग सारे जमाने में

लगेगी सदिया रूठो को मानने में
अजब सी बात है ये दिल के फसाने में

उम्र गुजरी है एक एक पैसा कमाने में
मिट्टी से खुद घर अपना बनाने में

आराधना राय