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दामन







दिल ये अहसास के बंधन को ज़िया जाता है
बस तेरे इश्क़ में बदनाम हुआ ये ही जाता है

चोट लगे तो यू कभी भी रोकर ये सो  जाता है
तेरे दामन में सिमट कर तुझ से बता जाता है

दिल के दर्द का तुझ को यू ये पता बता  देता है
रख के कंधों पे सर आँसू भी बहा यू ही ये देता है

तेरी बात तुझ से कर ख़ुद हालात पे  रो ही देता है
साया गुमनाम सा "अरु " का ही तो पता दे देता है
आराधना राय
copyright : Rai Aradhana ©


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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है
देख कर आए है दुनियाँ सारी
ना वो दर रहा ना वो घर रहा
आँधियों  का डर नहीं था धरोंदे को
मेरा दिल ही हादसों के नज़र रहा
तोड़ दी कमर मेरी गरीबी ने
मै जहां रहा  बे शज़र रहा
आ गए याद मुझे चहरे पुराने
उन्ही के नगर बे डगर रहा
अरु