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क्या देती


साभार गुगल



मैं तुझे इस दिल के सिवा क्या देती
अधूरी बची ज़िन्दगी उधार क्या देती

तुम एक हसीन सहर की बात करते हो
मैं तुम्हें उदासियों कि शाम क्या देती

मेरे मुक्क़दर में रोशनी ही  कुछ कम थी
मैं तुझे अंधेरों के सिवा यू भी क्या देती

तुम वफ़ा के मायने समझा गए मुझको
मैं उलझे हुए ज़ज़्बात के सिवा क्या देती
आराधना राय












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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला