Skip to main content

जीवन कि धुरी होती है

जीवन कि धुरी होती है
--------------------------------

माँ का दिल होता नहीं औरो सा
दिल के ज़ख्मों को सी लेती है
अश्क़ चुपके से भी पी लेती है
बात कैसी भी हो वो सह लेती है
माँ मर कर भी जी कैसे लेती है
मेरे गुनाहों को माफ़ कर देती है
प्यार कि चादर से ढक वो देती है
किसी बात का गिला नहीं उसको
जो मांगा नहीं वो भी तो दे देती है
 खुदा हो कर भी खुदा कहा होती है
 कभी धरती कभी सागर हो लेती है
माँ जितना भी कहु कम है तेरे लिए
 कभी हारी ना जीती जीवन के लिए
माँ तू यू भी कैसे ऐसे ही ज़ी लेती है
 दूर हो तो जीवन ही दूर सा लगता है
माँ तू ही  इस जीवन कि धुरी होती है
आराधना राय

याद आई
-----------------------
आज ना जाने क्यू मुंशी प्रेम चंद कि ईदगाह याद आई
हमीद तेरे चिमटे मांगी हो कोई दुआ कही याद हो आई
माँ तेरे प्यार से भीगा मेरा ही आँचल ये ही सदा बस आई
कैसा भी रहा हो  मैला आँचल  बस  बात इतनी समझ आई
नारी तेरा जीवन कैसा भी हो जब तुझ में कहीं माँ नज़र आई
तू मुझे बस यशोदा , कौसल्या ,अनुसूइया , अंजनी नज़र आई
कालकोठरी में देवकी सी , माताजगत जननी ही तू ही कहलाई

Post a Comment

Popular posts from this blog

नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला