Skip to main content

गज़लें अश्क में ढाली हुई


मेरे नाम दिन के उजाले हुए है
अंधेरों को हम क्यों पाले हुए  है

किन मज़बूरियों में  ढाले हुए  है
हालत तंग दिल में छाले  हुए  है

ख्वाब क्यों हमने फिर पाले हुए है
 हसरतों कि ख्वाहिशें जाने  हुए  है
=================================
गर ज़िन्दगी तू ख्वाब है
क्यों हसरतों के नाम है


देख शिवालय भी गिरते  है
मरते है उफ नहीं करते है

लोग जीवन के लिए रोज़
मर कर भी यही उठते है


कौन सा कहर था आँखों पे
अश्क बन के जो निकलते  है

सिर्फ एक निवाले के लिए नहीं
ज़िंदगी जीने के लिए जलते है

मौत तू आ भी गई कहीं से गर
तेरे सामने हंस के गुज़रते से  है

ज़िन्दगी भूख सही दर्द  गम सही
अश्क  आँखों में भर के हँसते  है

आराधना
नेपाल त्रासदी पर
--------------------------------------------
कैसा ये शोर उठा ,हर तरफ कहर जारी
पत्थर दिल मोम हुए रूठी दुनियाँ  सारी

लगी हुई थी नर्तन करने चारों ओर तबाही
माँ से बच्चे अलग हुए यू टूटी दुनियाँ सारी

मिलने और बिछड़ने में ही लगा हुआ संसार
सब अपने अश्क़ में डूबे और बच्चे हुए अनाथ
आराधना राय





Post a Comment

Popular posts from this blog

महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 
कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला