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जाने वाला

 मेरा रहबर है वो बताती रही 
तेरे साथ जो था जाने वाला 

तन्हाई ये कौन सी बाक़ी रही  
दिल को जो था जोड़ने वाला

 एक फ़क़त याद ही बाकी रही 
  उसकी तस्वीर ये बताती रही 
  
हर शाम को जो लुभाती ही रही
किसकी किस्मत थी बताती रही 

नाज़ों नख़रे वो यू उठती ही रही 
काँच सा दिल है बताती ही रही 

मैं उम्र भर इंतज़ार ही करती रही 
ले गया घर मेरा उठ के जाने वाला 


 आराधना  















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महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 

नज़्म

रोज़ मिलती है सरे शाम बहाना लेकर
जेसे अँधेरे में उजालों का फसाना लेकर

चाँद के पास से चाँदनी का खजाना लेकर
मुझको अनमोल सा एक नजराना देकर

मेरा दर दर नहीं कुछ नहीं है क्या उसका
जब भी मिलती है यही एक उलहना लेकर

रात भर कितने आबशार बहा के जाती है
पर वो जाती है तो किस्मत का बहाना लेकर -
आराधना राय

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला