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कठोर धरातल

साभार गुगल इमेज 

छूटे अब  सभी खिलौने 
रूठा बचपन का संसार 
हाथ क्या आया उनके 
ये कागज़ का व्यापार 

भीख मांगते उन  हाथों को 
मिला जब अभाग्य अपार 
नही किताबें संगी जिनकी  
क्या उन्हें ना भाया प्यार 

रही सदा फीकी ममता ही 
ना मा और पिता का साथ
लड़ा लड़कपन सड़कों सड़कों 
लेकर भटके हाथ कटोर- दान 

कठोर धरातल , मैला आँचल 
क्या निभा पाया उन से संसार 

दोष क्या देना उनका फिर भी 
थे विधि के ये  सब क्रूर विधान 

कभी -कही तो सब कुछ पाकर 
 जग में और करें बस  हाहाकार 
आराधना 





















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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है
देख कर आए है दुनियाँ सारी
ना वो दर रहा ना वो घर रहा
आँधियों  का डर नहीं था धरोंदे को
मेरा दिल ही हादसों के नज़र रहा
तोड़ दी कमर मेरी गरीबी ने
मै जहां रहा  बे शज़र रहा
आ गए याद मुझे चहरे पुराने
उन्ही के नगर बे डगर रहा
अरु