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कठोर धरातल

साभार गुगल इमेज 

छूटे अब  सभी खिलौने 
रूठा बचपन का संसार 
हाथ क्या आया उनके 
ये कागज़ का व्यापार 

भीख मांगते उन  हाथों को 
मिला जब अभाग्य अपार 
नही किताबें संगी जिनकी  
क्या उन्हें ना भाया प्यार 

रही सदा फीकी ममता ही 
ना मा और पिता का साथ
लड़ा लड़कपन सड़कों सड़कों 
लेकर भटके हाथ कटोर- दान 

कठोर धरातल , मैला आँचल 
क्या निभा पाया उन से संसार 

दोष क्या देना उनका फिर भी 
थे विधि के ये  सब क्रूर विधान 

कभी -कही तो सब कुछ पाकर 
 जग में और करें बस  हाहाकार 
आराधना 





















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महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 
कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला