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फिर आऊँगी پھر اوگي






तुझसे बिछड़ी तो मैं
 फिर  बिखर जाऊँगी।

फिज़ाओ में मैं  तुझे
रंग बन के पाऊँगी।

भीगते सावन में मै
बारिश  बनके आऊँगी।                              

बूंद -बूंद बरसूँगी मैं
आँखो से भीगा जाऊँगी।

बेक़रार तमन्ना लिए
सहर बन के आऊँगी।      


copyright : Rai Aradhana ©
आराधना              

تجھسے بچھڑی تو میں
 پھر بکھر جاؤں گی.

پھذاو میں میں تجھے
رنگ بن کے پاوںگی .
بھيگتے ساون میں مے
بارش بن کے اوگي .

بوند -بود برسوگي میں
آںکھو سے بھیگا جاؤں گی.

بےقرار تمنا لئے
سحر بن کے اوگي .

ارادھنا
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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

अच्छा था

ज़िन्दगी तेरे बिना जी लेते तो अच्छा था
दामन आंसुओं में भिगो लेते तो अच्छा था
सुना कर हाल दिल का रात भर रोये
तुम से राब्ता न होता दिल का तो अच्छा था
दिल धड़कता रहा मगर जुबा चुप थी
मेरे इकरार को इंकार समझ लेते तो अच्छा था
ख़ुशी की महफिले कम पड़ी गम भुलाने में
हमें तुम याद न आते अरु तो अच्छा था

ग़ज़ल

लगी थी तोमहते उस पर जमाने में
एक मुद्दत लगी उसे घर लौट के आने में

हम मशगुल थे घर दिया ज़लाने में
लग गई आग सारे जमाने में

लगेगी सदिया रूठो को मानने में
अजब सी बात है ये दिल के फसाने में

उम्र गुजरी है एक एक पैसा कमाने में
मिट्टी से खुद घर अपना बनाने में

आराधना राय