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फिर आऊँगी پھر اوگي






तुझसे बिछड़ी तो मैं
 फिर  बिखर जाऊँगी।

फिज़ाओ में मैं  तुझे
रंग बन के पाऊँगी।

भीगते सावन में मै
बारिश  बनके आऊँगी।                              

बूंद -बूंद बरसूँगी मैं
आँखो से भीगा जाऊँगी।

बेक़रार तमन्ना लिए
सहर बन के आऊँगी।      


copyright : Rai Aradhana ©
आराधना              

تجھسے بچھڑی تو میں
 پھر بکھر جاؤں گی.

پھذاو میں میں تجھے
رنگ بن کے پاوںگی .
بھيگتے ساون میں مے
بارش بن کے اوگي .

بوند -بود برسوگي میں
آںکھو سے بھیگا جاؤں گی.

بےقرار تمنا لئے
سحر بن کے اوگي .

ارادھنا
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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




नज्म

नज्म
हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का
खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का
कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का
मेरे इकरार पर उनका इसरार होगा जब तभी तो बात बनेगी रिश्ता निभाने का
आराधना राय
देख कर आए है दुनियाँ सारी
ना वो दर रहा ना वो घर रहा
आँधियों  का डर नहीं था धरोंदे को
मेरा दिल ही हादसों के नज़र रहा
तोड़ दी कमर मेरी गरीबी ने
मै जहां रहा  बे शज़र रहा
आ गए याद मुझे चहरे पुराने
उन्ही के नगर बे डगर रहा
अरु