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हर लड़की








साभार गूगल इमेज
सड़क पर चलती
हर लड़की
कहीं भी दिखी
आदमी को
मांस  का टुकड़ा
 भर ही लगी
देखा जिसने भी
सिर्फ लड़की
तुझे बस एक जिस्म
  सा देखा
औरत तू महज़ एक
 खिलौना है
तेरी सोच भी कुछ
 तो रही होगी
भागती भीड़ में
कहीं तू भी यही
दुःख के अहसास में
भरी होगी
काश जान पाता
 हर कोई
जिस्म से अलग
 तू कोई जान
 होगी एक
,मरियम सी
सीता , सी  या
रेहाना  सी
किसी कि
नज़रें क्यों
हो वहशहना सी

@ कॉपी राइट आराधना






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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




नज्म

नज्म
हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का
खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का
कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का
मेरे इकरार पर उनका इसरार होगा जब तभी तो बात बनेगी रिश्ता निभाने का
आराधना राय

नज्म

उम्र भर के निशा ढूंढते है
ऐ - सहर हम तुझे ढूंढते है तू सितारा है आसमा का 
दर -ब -डर हम तुझे ढूंढते है तू है सागर में भी हु नदिया
तेरे कदमो में पनाह ढूंढते है राते कितनी भी हो गई काली
एक उजाले को हम ढूंढते है ---------------अरु