Skip to main content

गम



साभार गूगल





यू ही मिटने के लिए
और मिटाने के लिए

हसरतें जां क्यू  रहेगी
क्या तुझे पाने  के लिए

मांगा क्या मिल गया
उम्र निभाने के लिए

यू ही एतरफ किये जा
खुद को भुलाने के लिए

अब भी मदहोश किय जा
है आये तुझे पाने के लिए

दिल में है यू ही वो जले
गम -ए  यादों के लिए

अब ये ग़फ़लत ही सही
एक तुझे पाने के लिए

कुछ ना कह सके हम
उनको बताने के लिए

माना मज़बूर मेरे  हालात
 बहुत से  रहे होंगे "अना"

आराधना            अना"  माने respectful use as pen name







Post a Comment

Popular posts from this blog

महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 
कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला