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गम



साभार गूगल





यू ही मिटने के लिए
और मिटाने के लिए

हसरतें जां क्यू  रहेगी
क्या तुझे पाने  के लिए

मांगा क्या मिल गया
उम्र निभाने के लिए

यू ही एतरफ किये जा
खुद को भुलाने के लिए

अब भी मदहोश किय जा
है आये तुझे पाने के लिए

दिल में है यू ही वो जले
गम -ए  यादों के लिए

अब ये ग़फ़लत ही सही
एक तुझे पाने के लिए

कुछ ना कह सके हम
उनको बताने के लिए

माना मज़बूर मेरे  हालात
 बहुत से  रहे होंगे "अना"

आराधना            अना"  माने respectful use as pen name







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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




नज्म

नज्म
हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का
खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का
कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का
मेरे इकरार पर उनका इसरार होगा जब तभी तो बात बनेगी रिश्ता निभाने का
आराधना राय
देख कर आए है दुनियाँ सारी
ना वो दर रहा ना वो घर रहा
आँधियों  का डर नहीं था धरोंदे को
मेरा दिल ही हादसों के नज़र रहा
तोड़ दी कमर मेरी गरीबी ने
मै जहां रहा  बे शज़र रहा
आ गए याद मुझे चहरे पुराने
उन्ही के नगर बे डगर रहा
अरु