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ना कुछ सत्य है ,ना शिव और ना कुछ सुन्दर है





ना कुछ सत्य है ,ना शिव और ना कुछ सुन्दर है
जीवन-तू क्या है बस दुःख का अथाह समुन्दर है

आती-जाती श्वासों की इन लहरों में कोलाहल सा
बसा हुआ निश्वासों का उत्ताप मचाता जीवन सा

अधरों पर बन कर एक पहचान अमित चिन्ह   सा
या अंत समय आये कोई अनचीन्हे एक अतिथि सा

गरिमा सुख की कब कहो सलिल सरित सा बहती थी
विश्वास के चन्द्र जब  लहरों में ज़्वार -भाटा  लाते थे   


हर पल तेरे इन नयनो ने तूफान छिपा सा रहता है
हर पल मेरी ही बातें वेग कुछ   समय का छलती है

जीवन तू छीन-भिन  है उच्छल सा मेरे  सपनों सा
तू  जीवन क्षुधा -तृषित मरीचिका मृग तृष्णा सा
आराधना  copyright : Rai Aradhana ©

एक शब्द आपने दिया था पापा एक शंब्द मैंने लगा कर आपकी कविता पूरी की पर आप के जाने के बाद 
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महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 
कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला