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. जब भी मिली

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                 जब मिली

रंज औ गम की उम्र भर जो भी सौगात मिली
सहर के साथ- साथ ,शबे -गम की बारात मिली । 

अश्क बहते रहे ,उन्हें  हम बस यूही सहते रहे 
ख्वाब के दरवजो पर ,रूह गमज़दा सी मिली। 

मेरा हर एक ख्वाब, रहा ,आधा -अधूरा ही सही
मेरे लब पे जो दुआ आई , वो तुझको तो  मिले

अपने आँसूओ को कुछ इस  तरह सजाया मैने  
 गर छलक जाये ज़िन्दगी का  तुझे जाम मिले  

 बेनूर सा  ,बे रंग सा बेनाम सा  चेहरा लेकर
मुझसे मिलती भी है ,तो दूर बहुत दूर मिली

हाथ वीरानियों के सिवा कुछ  भी ना आएगा
मेरी हमशक्ल सी ,तकदीर बन मुझसे  मिली


 हांफ़ते - कांपते  ,हुये  इन कदमो को "अना"
ज़िन्दगी तू भी  मिली तो ,फ़क़त उधार मिली। 

copyright rai aradhana rai ©


water mirroring lake
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. جب بھی ملی

رنج او غم کی عمر بھر جو بھی سوغات ملی
سحر کے ساتھ ساتھ شب -گم کی بارات ملی.

كاگذو پر، اشک بہتے رہے، ہم رہتے رہے
میرے غمگین اندھیروں تمہے زندگی تو ملی.

میرا ہر ایک خواب، رہا، نصف -دھورا ہی سہی
میرے لب پہ جو دعا آئی، وہ تجھکو تو ملی

اپنے اسوو کو کچھ اس طرح سجایا مینے
  گر چھلک جائے تو بھی تو تجھے ایک جام ملے

  بےنور سا، بے رنگ سا گمنام سا چہرہ لے کر
مجھ ملتی بھی ہے، تو دور بہت دور ملی


  هافتے - کاںپتے، ہوئے ان كدمو کو "انا"
زندگی تو بھی ملی تو، فقط قرضے ملی.

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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

अच्छा था

ज़िन्दगी तेरे बिना जी लेते तो अच्छा था
दामन आंसुओं में भिगो लेते तो अच्छा था
सुना कर हाल दिल का रात भर रोये
तुम से राब्ता न होता दिल का तो अच्छा था
दिल धड़कता रहा मगर जुबा चुप थी
मेरे इकरार को इंकार समझ लेते तो अच्छा था
ख़ुशी की महफिले कम पड़ी गम भुलाने में
हमें तुम याद न आते अरु तो अच्छा था

ग़ज़ल

लगी थी तोमहते उस पर जमाने में
एक मुद्दत लगी उसे घर लौट के आने में

हम मशगुल थे घर दिया ज़लाने में
लग गई आग सारे जमाने में

लगेगी सदिया रूठो को मानने में
अजब सी बात है ये दिल के फसाने में

उम्र गुजरी है एक एक पैसा कमाने में
मिट्टी से खुद घर अपना बनाने में

आराधना राय