Skip to main content

दिल


दर्द जब ज़ुबां देता है , खूबसूरत अहसास को जन्म देता है
पानी में उठते बुलबुलों कि तरह रोज़ मरते है रोज़ जीते है
क्यू फ़से है इस कफ़स में यहाँ ऐसी उलझन में यू रहते है
शिकवा हम यहाँ किस से करे मेरी दुनियाँ ही रूठ के बैठी है
एक तेरे नाम पे जीते है ,हॅंस के दुख भी अब झेल ही लेते है
इश्क है तुम से खुद को बहला कर हम भी तो जीते ही रहते है
आराधना राय
copyright : Rai Aradhana ©




मेरे नाम दिन के उजाले हुए है
अंधेरों को हम क्यों पाले हुए है
किन मज़बूरियों में ढाले हुए है
हालत तंग दिल में छाले हुए है
ख्वाब क्यों हमने फिर पाले हुए है
हसरतों कि ख्वाहिशें जाने हुए है


copyright : Rai Aradhana ©
Post a Comment

Popular posts from this blog

महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 
कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला