Skip to main content

अफ़साना




किसका इंतज़ार था तुझे  भी यू ए दोस्त
वह कहकशां भी अपने ही साथ ले के गया

दामन में सिर्फ़ आँसू थे उसकी ही याद के
बीते हुए पल कि वो हर ख़ुशी भी ले के गया

ना जाने किस बज़्म  में तुझे वो अब मिले
वो जाते हुए "अरु "अपनी दास्ताँ कह गया

आराधना राय "अरु"
 Rai Aradhana ©
------------------------------------------------------

शब्द के अर्थ 

बज़्म  -महफ़िल ,Gathering 
कहकशां -"Highest place" प्यारा , ब्रम्हांड , 
 दास्ताँ - story , अफ़साना




Post a Comment

Popular posts from this blog

नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला