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सौदा

     


                
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एक सौदा कर लिया है इश्क़ के बाज़ार में
तेरे  नाम पर मरना जीना तेरे ही नाम पे

तुम्हारी आदतों में मेरी आदतें भी शुमार है
तेरी  आवाज़ में मेरी आवाज़  का ख़ुमार है

ये मिरज़ -ए -इश्क़ है नाकामियों के नाम पे
हम खुद आ कर रूक गए है एक तेरे नाम पे

साथ तेरे यू चल पड़ा बस  क़ाफ़िला था नहीं
हमसफ़र कोई कहाँ था "अरु" तन्हां ही सही

आराधना राय



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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




नज्म

नज्म
हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का
खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का
कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का
मेरे इकरार पर उनका इसरार होगा जब तभी तो बात बनेगी रिश्ता निभाने का
आराधना राय

नज्म

उम्र भर के निशा ढूंढते है
ऐ - सहर हम तुझे ढूंढते है तू सितारा है आसमा का 
दर -ब -डर हम तुझे ढूंढते है तू है सागर में भी हु नदिया
तेरे कदमो में पनाह ढूंढते है राते कितनी भी हो गई काली
एक उजाले को हम ढूंढते है ---------------अरु