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दर्द


साभार गुगल इमेज
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दर्द जब  ज़ुबां देता है , खूबसूरत अहसास को  जन्म देता है 
पानी में उठते बुलबुलों कि तरह रोज़ मरते है रोज़ जीते है 

क्यू फ़से  है इस कफ़स में यहाँ ऐसी  उलझन में यू रहते है
 शिकवा हम यहाँ किस से करे मेरी दुनियाँ ही रूठ के बैठी है

एक तेरे नाम पे जीते है ,हॅंस के दुख भी अब  झेल ही लेते  है
 इश्क है तुम से खुद को बहला कर हम भी तो जीते ही  रहते है 
आराधना राय

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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




नज्म

नज्म
हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का
खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का
कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का
मेरे इकरार पर उनका इसरार होगा जब तभी तो बात बनेगी रिश्ता निभाने का
आराधना राय

नज्म

उम्र भर के निशा ढूंढते है
ऐ - सहर हम तुझे ढूंढते है तू सितारा है आसमा का 
दर -ब -डर हम तुझे ढूंढते है तू है सागर में भी हु नदिया
तेरे कदमो में पनाह ढूंढते है राते कितनी भी हो गई काली
एक उजाले को हम ढूंढते है ---------------अरु