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किसकी पुकार है

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साभार गुगल इमेज़

इस गंदले उथले पानी में कुछ भी साफ़ नहीं है
ठहरे पानी में किसकी परछाई नज़र आती है

खुद को भी पहचानना भी तो  अब सरल नहीं है
देख कर आत्मा भी यहाँ पर क्यों तड़पती नहीं है

किसकी पुकार है  आवाज़ बन के उभरती रही  है
कौन जाने वक्त ने यहाँ कैसी क्या चाल चली  है

जंग लगे कितने  दिलों में  वो कौन से अरमान है
जिन  के लिए चले जब राह ,में वो भी पास नहीं है

रास्ते ही रास्ते है मंज़िल का भी अब पता नहीं है
इससे आगे मेरे लिए भी क्या कहे जगह  नहीं  है
आराधना





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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
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आराधना राय 




नज्म

नज्म
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नज्म

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एक उजाले को हम ढूंढते है ---------------अरु