Skip to main content

मन कि वृद्धि

मन कि वृद्धि
--------------------
रोज़ - एक ही सोच थी
सब कुछ बदल जायेगा
वक्त के साथ परेशानी
चली जाएगी और जीवन
 सरल हो  भी यही पायेगा।
उस दिन वो धबरायेगी नहीं
साहस से जीवन महकाएगी
इस  कशमकश में जी पायेगी
उस लड़की के पिता नहीं थे
पर ज़िम्मेदारी थी बोझ थी  
इसलिए ज़िन्दगी हँस  कर
 भुला रोज़ -यही सोचती थी
 सब परेशानी  चली  जायेगी
 जीवन जीने के लिए कोई
सरल युक्ति  भी आएगी।
 पर सोच लेने से मात्र  से
जीवन आसान कब हुआ  है
ऑफिस में जीवन संघर्ष हुआ है
 लेने - देना से ही यहॉ  सब है
कनेक्शन प्रमोशन यही  सब
मन में अरमान आस भी एक 
तनख्वाह में बढ़ोतरी हो जाये,
 पर ऐसा कब हुआ, ऑफिस में
सब से कम काम करने वाली
सुंदरी भी उस से बाज़ी मार गई
अप्रेज़ल वाले दिन सब पा गई 
 ज़ुबा पर ताले मन बेचैन थे
सबने  नया सबक सीखा था।
 नए बॉस  चाय पीते देखा था ,
बात प्रेम या प्रीत कि नहीं थी
अन्तर मन,भी  इन्टर- कनेक्शन
की थी हर पावरफुल आदमी कि बात
सब  ही मानते है उसे जानते है  
जान गई थी, कोई दुखी मन से भी
ज़िंदगी तार लेता है कोई सब कुछ कर
कशमकश में जीता है ,मरता भी है
उस लड़की के पिता नहीं थे याद था सबको
ज़िम्मेदारी थी कंधो पर मेरे भी बोझ था 
इसलिए ज़िन्दगी हँस  कर रुला कर
ले रही थी हर मोड़ पे  इम्तेहान इम्तिहान
 दुसरो के हालत का ज़ायज़ा ना लेकर वो
फिर काम करने में लग गई सोच यही थी 
 हाथ पकड़ कर कुछ दूर तो चल सकते है
ज़िन्दगी अपनी मेहनत और लगन से ही
ज़ी कर साधी जाती है उधारी  नहीं ज़ी जाती
आँखों में आँसू तो थे शबनम से झिलमिलाते
अब उसे मन के  अटल विश्वास में जीना था
आगे बढ़ना था  खुश हो बस जीवन जीना था
आराधना राय

किसी के प्रलाप भयंकर इसलिए देव हुए यू भयंकर ,अभयंकर
मानव ने जब मानव अधिकार हरे उन्हें देख देवालय भी तो  गिरे।

Post a Comment

Popular posts from this blog

नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




नज्म

नज्म
हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का
खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का
कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का
मेरे इकरार पर उनका इसरार होगा जब तभी तो बात बनेगी रिश्ता निभाने का
आराधना राय
देख कर आए है दुनियाँ सारी
ना वो दर रहा ना वो घर रहा
आँधियों  का डर नहीं था धरोंदे को
मेरा दिल ही हादसों के नज़र रहा
तोड़ दी कमर मेरी गरीबी ने
मै जहां रहा  बे शज़र रहा
आ गए याद मुझे चहरे पुराने
उन्ही के नगर बे डगर रहा
अरु