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क्या था

aye aru" ---------------------------------------------------  hume khud se koi bhi vasta na tha  zindagi main koi bhi rasta na tha  rahe lambi thi bhut lambi thi mager  mujhe suraj ka yu vasta hi na  tha khoye khud hum apne main yu kahi hame andhero main rasta  na  tha ruh pyasi rahi sadiyao tak yu hi kahi inn uzalo se mera kabhi vasta na tha sapne ankho main yu hi palte kyu rahe hamko in khwabo se vasta  na tha yu tera ruk ker chalan kahta tha kabhi  "aye aru" rasta main koi mila na tha  क्या था ---------------------------------------------------- हमें खुद से कोई भी वास्ता क्या था ज़िंदगी में कोई रास्ता ना था राह लंबी थी बहुत लंबी थी  मगर उसको सूरज से वास्ता ना था खोए यू कहीं खुदा अपने में हम कही हमें अंधेरों में रास्ता ना था रूह प्यासी रही सदियों तक कहीं इन उजालों से "अरु"  वास्ता  ना था copyright :  Rai Aradhana   © -------------------------------------------...

वास्ता क्या था

हमें खुद से कोई भी वास्ता क्या था ज़िंदगी में कोई भी रास्ता ना मिला राह लंबी थी बहुत लंबी थी ये मगर उसको सूरज से वास्ता ना यू मिला खोए यू कहीं खुदा अपने में हम कही हमें अंधेरों में ही कभी रास्ता ना मिला रूह प्यासी रही सदियों तक यू ही कहीं इन उजालों से "अरु"  वास्ता यू ही मिला आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   ©

बातें

                           बातें बात लफ़्ज़ों में हो गई होती जो ये दूनियाँ भी संभल गई होती दिल कि बातें रूह से रूह कि हुई  दुनियाँ थी यहाँ ही रही होती बेशर्म कि बेशर्मी ही यू रही पूरी दुनियाँ गर ये परेशान रही होती बहाने बना कर चले आते है वो चोट ख़ुद को लगा लाए तो  होते वो हँसे तो दुआ सी लगे आँख के आँसू भी बददुआ हो गई होते     ख़तावार को सज़ा दे ऐसी जिसकी माफ़ी कहीं नही यू ही होती तू फसाना थी तो बहाने कि तरह वो भी तो कहीं से आया होता तेरे गम कि छाँव में भी  "अरु"  वो ही रह गया ना कहीं यू होता  आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   ©

दामन

दिल ये अहसास के बंधन को ज़िया जाता है बस तेरे इश्क़ में बदनाम हुआ ये ही जाता है चोट लगे तो यू कभी भी रोकर ये सो  जाता है तेरे दामन में सिमट कर तुझ से बता जाता है दिल के दर्द का तुझ को यू ये पता बता  देता है रख के कंधों पे सर आँसू भी बहा यू ही ये देता है तेरी बात तुझ से कर ख़ुद हालात पे  रो ही देता है साया गुमनाम सा "अरु " का ही तो पता दे देता है आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   ©

होता

               होता  ---------------------------------------------------------------- अजब बात थी जो वो भी मुकर गया  होता सुना के हाल वो  किसको बहलाने आया है तमाशाई था तमाशा दिखा गया वो यू होता कौन था यू चुप चाप सा बन रह  गया होता वो वादे वफ़ा के नए -नए से ही कर गया होता वो रोज़ ज़फा भी यू किसी से कर के गया होता आराधना राय   copyright :  Rai Aradhana   ©

लगे

            लगे --------------------------------------------- ज़ख़्म उनका हो तो बहुत गहरा लगे मेरा खून गिरे तो भी पसीना ही लगे वो मेरे ख्वाब नींदों में चुरा जाने लगे वो शख्स मुझे क्यू ना अपना सा लगे मैं दबे पाँव भी आ कर ठहर जाऊँगी ज़िंदगी तेरा भरोसा है हँस के जाऊँगी आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   ©

नारायणी

अटल विश्वास के लिए साथ  खड़ी हूँ मैं अपने सत्य से भी यू कहीं परे हूँ क्या मैं स्वाधीन, मुक्त हूँ प्रश्न का उत्तर हूँ मैं धरती धरणी धीर सी अम्बर कथा हूँ मैं वीरकण से बनी धीर प्रतिमूर्ति ही  हूँ मैं मौन मूक वेदना कि ये एक कड़ी  हूँ  मैं अटल हूँ सजगता  से खड़ी हुई तो  हूँ मैं जन्मों तुझ से कहीं यू जुड़ी ही रही हूँ मैं सृष्टि कि अनमोल रचना भी रही हूँ मैं दुष्ट भंजनी  बाहुबल , नारायणी  हूँ मैं जीवन दायनी प्रबला मुक्तेश्वरी   हूँ  मैं अनेक रूपा "अरु" स्वरूपा भी तो  हूँ मैं आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   ©

दे दिए

ज़िंदगी के दीये यू ही जला दिए  राह आसान ना थी रास्तों में घर बना दिए।  तेरी बात को गले यू ही लगा लिए कौन था जिसने हर बार गहरे ज़ख़्म लगा दिए  करूँ क्या उन से में यू ही तौबा जिन्होंने दूसरों के घर यू ही सरेआम जला दिए    जाने  तुम क्यों ना सम्हल पाए  अपनी तमन्नाओं के लिए   दूसरों के दामन जला दिए   ज़माने ने  सौ दाग़ मुझे ही दिए कई चराग़ जलने से पहले ही  खुद खुदा बन बुझा दिए   हालत पर बात यू ही बना दिए वक़्त ने मेरी आँख में "अरु"  आँसू यू ही क्यों दे दिए  आराधना राय    

दिदार

ज़िंदगी हँस के यू  बहल जाती तो अच्छा था नया पैग़ाम सुना जाती तो कुछ अच्छा था। रोज़ वादे कर के वो जाती तो कुछ अच्छा था तेरा दिदार भी  कुछ कराती  बहुत अच्छा था वो मुझ से रुख़्सत ना हुई होती तो अच्छा था सुनहरा सा ख़्वाब दिखा जाती तो अच्छा था सफऱ को  मुक़ाम  बना जाती तो ही अच्छा था तराने सुना कर  "अरु" जाते तो ही अच्छा था आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   ©

राज़

           ---------------------------------------------------- चले जो बच के साहिलों से उसमें भी तो कुछ है लहरों से बच कर कश्ती चली उसमे भी कुछ है आषाढ़ कि बारिश यू ही लगे सावन कि झंकार है उसकी बात नहीं कोई यू ही बेबात उसमें  कुछ है मंज़िले अपना जब रास्ता खुद ही कहीं यू ढूँढती है दिल तो रोया आँख में आसूँ ना आए उसमें कुछ है बादल तो बरसे खूब पर तुम नहीं क्यू नही तुम आए उस में जो बात है "अरु"उसमें भी राज़ भी तो कुछ है आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

पास तेरे हूँ

                                                                 पास तेरे हूँ   ------------------------------------------------------------ मेरी आँखों में हो तुम  दिये की लौ की  तरह तेरे आँगन में लौटी हूँ मैं भी तुलसी कि तरह मुझे माथे पे ना लगाना तुम चंदन कि तरह तेरे पास नहीं हूँ में किसी भी बंधन कि तरह मेरी आखों  में सजोगे  तुम अंजन कि तरह मेरे हाथों में सजोगे तुम भी कंगन कि तरह हीरा ना समझना जली हूँ  कोयले कि तरह मेरे पारस तुम ही सम्हालों यू ही कंचन तरह लौ बन के जलूँगी तुम्हारी ही संगनी कि तरह वो चलती रही "अरु" मन से भी मीरा कि तरह आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

हम सनम

  --------------------------------------- तेरा हर बात गवारा है हमें तेरी चुपी ही ने मारा है हमें मृग तृष्णा अब कहाँ रहेंगी नाव नदियाँ में ही जो बहेंगी तेरी जीत पे  हँस के जीते हम तेरी हार पे भी यू हारे बस हम थाम जीवन कि पतवार फिर ले चल माँझी नाव पार फिर यू तुम संग  ये प्रीत लगा हम हारे है सब कुछ "अरु"  सनम आराधना राय

पिया संग प्रीत

--------------------------------------------- पिया तुम संग प्रीत ही अजब यू रचाऊँ मीरा कान्हा कि हो यू जब हो ही जाऊँ कहीं राधा बन कृष्णा का साथ निभाऊँ मीरा बन कृष्णा के पास क्यों ना जाऊँ अँखियों में सपनें भी उन के अब पा जाऊँ तुम्हें कैसे बिसर यू अब "अरु" कहीं जाऊँ आराधना राय 

कह जाते हो

आँखों से कौन सी बात कह जाते हो दिल में कहीं तुम समाते ही जाते हो तुम अपने नाम के दिये से जलाते हो होठो पे इक मुस्कान बन छा जाते हो मेरे आँसू भी तुम पी कर चले जाते हो "अरु" को संसार तुम देने चले आते हो आराधना राय

पीड सी

पात पात पर इठलाती प्रहरी भोर हो कोई सुनहरी तुम भोर हो पहली किरण कि और मैं ढलती साँझ सी कर रही नव किसलय स्वादन प्रथम रंगिणी विभोर सी मैं सूर्ये नहीं ना  हूँ रत्नाकर हूँ सूर्ये कि पीड सी                                                                                                                                                                   तिमिर को सह कर  ह्रदय में चंद्र कि विभा सी  मिटा कर आलोक में स्वयं को  बनी  नव गीत सी तुम जीवन के प्रयाण का प्राण मैं अंत हूँ सुरभि सी छेड़ती है राग-प्रेम बन  "अरु" का ...
             चली आएगी  ==================== चुप चाप एक दिन चली आएगी  उदास  चेहरे पे हँसी भी  आएगी  ज़िंदगी के नए फ़लसफ़े सुनाएगी  दास्ताँ अपनी भी वो सुना जाएगी  आँखों के फ़साने तुझे भी सुनाएगी  एक दिन चुप चाप चली वो जाएगी  शाम ना कोई फ़िर आज सी आएगी  वो चुप चाप आई थी चुप ही जाएगी  ग़मों का सौदा कर खुशी दे जाएगी  ये "अरु" भी  हज़ार बात कह जाएगी  आराधना राय 

बाबूल

बाबूल --------------------------------------------------------- बचपन में तेरी उंगली को जब यू थाम चली थी डगर उसी दिन से ये लंबी पहचान ही चली थी तेरी बाहों में आ कर देखा ये पूरा ही संसार मैंने बाबूल तेरे आँगन कि वो ही नन्हीं सी कली थी तेरी बातों ने मेरी जुंबा को नए से शब्द ही दिए थे जीवन से पहचान उसी दिन ही जा कर तो हुई थी तेरे बिन अश्रु धारा कितनी यहॉ यू बहा कर चली हूँ बगैर धुप का पौधा ही हूँ पेड़ मैं कब बन ही सकी हूँ तेरी हर बात को आज भी मन में यू बसाए हुए हूँ कठिन से जीवन कि डोर "अरु " ये भी थाम चली हूँ आराधना राय
क्या कहिये  ------------------------------------------------    जिन कि फ़ितरत ही यू पत्थर से  मारने कि हो   प्यार कि बातें भी उन से अब यू  क्या कहिये  ज़ज़्ब कर रख ले बादल जब यू कोई आब ही ना बरसने वाली उस बरसात का क्या कहिये  तिश्नगी है इश्क़ कि यों बढ़ती ही ये तो जाएगी  रूह प्यासी रही ज़ज़्बात कि "अरु" क्या कहिये   आराधना राय  कोई रूह पुरानी  होगी कहीं , दिल कि वादियों ने पुकारा होगा कहीं  

कहाँ

                                कहाँ   --------------------------------------------------------------------- मेरे  चेहरे कि गढ़न भी याद होगी अब उसे कहाँ   उस का वास्ता मुझ से यू भी ऐसा भी रहा ही कहाँ वक़्त जब  चला  जाता है कोई रोक पाता है कहाँ बीतते लम्हों में कैद ये  जिस्म यू रह पाता  कहाँ ढूँढते फिरे जिसे जीने के लिए वो मिला ही कहाँ अनजान सी यादें थी "अरु " कोई जीया ही कहाँ आराधना राय 

गुज़रा

गुज़रा  ------------------------------------------------------------------------------------ वक़त निकला बहलने बहलाने में जैसा भी गुज़रा रेत पर जैसे यू ही वो हँस कर अभी अभी ही गुज़रा वो मेरी दिल कि राह गुज़र से हो कर जब भी गुज़रा वो मेरे जिस्म को नहीं मेरी  रूह को छू कर ही गुज़रा वो यू  करता रहा डूब कर दूर से प्यार कुछ यू मुझको  ठंडी फुहार सा दिल पे यू ही वो  दस्तक दे कर गुज़रा वो यू ही  करता रहा  दूर से बस  प्यार कुछ  मुझको ठंडी हवा का झोंका सा वो  दिल से ही हो  कर गुज़रा उसकी आँखों से देखती हूँ सारा ही ये अनछुआ ज़हान अधूरा फ़साना थी "अरु" वो मुझे मुकम्मल कर गुज़रा आराधना राय