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आज़ाद नज़्म पेड़ कब मेरा साया बन सके धुप के धर मुझे  विरासत  में मिले आफताब पाने की चाहत में नजाने  कितने ज़ख्म मिले एक तू गर नहीं  होता फर्क किस्मत में भला क्या होता मेरे हिस्से में आँसू थे लिखे तेरे हिस्से में मेहताब मिले एक लिबास डाल के बरसो चले एक दर्द ओढ़ ना जाने कैसे जिए ना दिल होता तो दर्द भी ना होता एक कज़ा लेके हम चलते चले ----- आराधना  राय कज़ा ---- सज़ा -- आफताब -- सूरज ---मेहताब --- चाँद

नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते  इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते  दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते  कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते  आराधना राय 

नज्म

नज्म हाल उनको भी पता है जमाने का नही यह काम उनको कुछ बताने का खुद ही तोड़ दी अपनी हमने अना यह खेल नहीं सनम उनको मनाने का कभी तो लब पे मेरा नाम लेते वो हमें काम नहीं कुछ उन को जताने का मेरे इकरार पर उनका इसरार होगा जब तभी तो बात बनेगी रिश्ता निभाने का आराधना राय 

अतुकांत

धुप के गावं में है बसेरा मेरा हर साया है मेरा हम साया मेरा बागवा को ना  कभी भरमाइए रंग रूप चेहरा मुक्मिल है सब का यहाँ रोज़ बातों से मेरा दिल यूँ ना बहलाइए ये दीवानगी मेरी कभी जाची नहीं इस पर अपना मुल्लाम्मा ना चढ़ाइए आराधना राय

वो

दुखों  कि  गठरी  बांध  कर वो  मेरे  घर  आता  है हँसता  है  मुस्कुराता  है अपनी  नम  आँखे  लिए वापस  लौट  जाता  है कैसे  कहे  वो  दर्द  सीने  के अपना  हर  रिश्ता  आज़माता  है किसे  दर्द  कह दे  किसी  के  नाम लिख  दे वह अपने  रंज  पर  बस ठहाके  लगता  है खामोश हो  सब  सह  लेगा  या दर्द का दरिया  बन  जायेगा एक  ना  एक  दिन  वो  समंदर  सा अपना सब  दर्द  सह  जायेगा आराधना

नज्म याद आता है

साभार गुगल सुबह होते ही तू याद आता है ए जालिम तू कितना सताता है ना मिला वो कोई रंज नहीं उसका दुख रह रह के बताता है यूँ तो मेरा वो लगता कोई नहीं  उसका मेरा सदियों का नाता है ना मिला वो कोई रंज नहीं उसका दुख रह रह के बताता है आराधना राय

नज्म

ना तेरे साथ जिया ना तेरे साथ मरा ए चश्मेतर मरा तेरे इक वादे पर मरा कोई दामन हवा में लहराता हुआ चला एक दिल था तेरे वादा ए इकरार पर मरा जहन के लाखो अँधेरे एक तेरे नूर पर मरे  अकेला दिल था, तेरे लबओ रुखसार पर मरा नीद आती तो थोडा सा सो लेते हम तेरे दामन् पे जीते जी ना लगता जैसे आज फिर कोई तस्वुर मरा आराधना राय

बंधन

साभार गुगल कविता कुछ प्रीत लिए कुछ रीत लिए बंधन जो तुमने बांधे है कैसे कह दूँ तेरे मेरे जीवन की साँझ हुई मौसम की हवाओं का क्या कहना ये तो बस आती जाती है मेरे जीवन की बगिया में सावन की बरसात बन कर आती है तूम हाँ कह दो तो सुबह हुई तेरे इक ना पे जान निकल सी जाती है आराधना राय अरु

जाता नहीं

  साभार गुगल आज रंज ओ गम का रंग जाता नहीं मय -ओ मीना का समा भाता नहीं मैंने दुनियाँ का चलन सीखा नहीं  बढ़ कर  मेरा हाथ उसने थामा नहीं हमसफर कब तू  मेरे साथ साथ था या गम ए दिल ने तुझे पहचाना नहीं   कल तलक सफर में थे मेरे आस पास आज कोई आवाज़ दे कर बुलाता नहीं आराधना राय अरु

नज्म

 नज्म माना जीने कि उम्मीद है कम फिर भी उम्मीद है मेरे जीने की सुलगती रहती है आवे की तरह सोच है मेरी या आग सीने की . रोज़ होती है आंखे अश्कबार सीख ली हमने अदा जीने की धडकती  रहती है सीने में कही लो लगा दी हमने आग सीने की

नज़्म -- दिल की बाते

साभार गुगल दिल ने दिल से बातें की आँखों ने इज़हार  किया वो कह दे तो दिन डूबा रातों ने इसरार किया पूरी दुनियाँ सोती है जब बातों का इकरार किया बोलती रहती है हरदम आखों ने सरोबार किया

किस्मत

आभार गुगल अधेरे स्याह थे उस दिन सितारों को किसी ने आजमाया था किस्मत की बाज़ी पे  कोई गोटी सही नहीं थी उस दिन वो ख़ाली हाथ घर आया था कहने - सुनने वाले लाखो थे जो उसे बचाता वो सितारा ना था ना उम्मीद सा वो अकेला शक्स नहीं था शमा को जला रोशनी  करे यही उसकी फितरत में कभी नहीं था टूट कर मजबूर हो रो दे उसे मंजूर नहीं था दो निवालो के लिए बिक जाए फिर ना किसी को वो नज़र आए लाख चाहा मगर उसका दिल माना नहीं था आराधना राय अरु

नये युग की प्रीत नज़्म

इश्क़ में हार - जीत की बाज़ी है हर शक्स इस खेल से राज़ी है हुई किसकी ख़ुशी से सगाई है दहेज़ संग कितना  यहाँ लाई है हिना कितनी हाथों पे लगाई है महक उड़ गयी लकीरे लगाई है चाँद का अक्स रोज़ -रोज़ देखा है  पैरों उचक कर हर पल को रोका है हजारों में  रिश्ता माँ का होता है पाक-साफ  "अरु" प्यार होता है आराधना राय अरु ہر شكس اس کھیل سے راضی ہے ہوئی کس کی خوشی سے منگنی ہے دهےذ ساتھ کتنا یہاں لائی ہے حنا کتنی ہاتھوں پہ لگائی ہے مہک اڑ گئی لكيرے لگائی hi چاند کا عکس روز -روذ دیکھا ہے   پیروں اچک کر ہر لمحے کو روکا ہے ہزاروں کی تعداد میں رشتہ ماں کا ہوتا ہے پاک صاف "ار" محبت ہوتی ہے آرادنا رائے Ishq defeat - is bet to win Everyone agrees with this game Simpsons Who has been engaged to gladly What has brought him here dowry Henna is made on how many hands Hi had flew away smelling Lkire Rose is a reflection of the moon seen -rojh  Every moment is prevented legs super- Education is the mother of thousands Clean "Aru" would love ...

नज्म चाँद रात

हाथो पे लिखी हर तहरीर को मिटा रही हूँ अपने हाथों  से तेरी तस्वीर मिटा रही हूँ खुशबु ए हिना से ख़ुद को बहला रही हूँ हिना ए रंग मेरा लहू है ये कहला रही हूँ दहेज़ क्या दूँ उन्हें मैं खुद सुर्ख रूह हो गई चार हर्फ चांदी से मेहर  के किसको दिखला रही हूँ सौगात मिली चाँद रात चाँद अब ना रहेगा साथ खुद से खुद की अना को "अरु" बतला रही हूँ आराधना राय "अरु"

मुमकिन नहीं है

तुम्हे भूल जाऊँ मुमकिन नहीं है चलो इस जहां को ही भूल जाऊँ फसाने हजारों मिलेगे तुम्हे भी हमारी गली से तूम राब्ता रखना भूल गर जाऊँ नगमे तुम्हारे हमारे चाँद को तूम दो पल याद कर लेना वफ़ा कीना पूछे, पूछे गम ए दिल मेरा मोहताज़ तू कब हो गया था वो मायूसी तेरी कामयाबी किसी की दिल इतना बेईमान कब हो गया था

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

वक्त लधुकथा

                                     तीनों ने समान बंधा और अपने अपने गंतव्य स्थल पर पहुँच कर एक दुसरे को लिखा, सफर अच्छा रहा ना में पटरी से उतरी ना लुटी गई..... ... । दूसरी ने लिखा अच्छा रहा ना किसी ने बम लगाया ना हिंदी इंग्लिश मराठी के नाम पर तोड़ा । तीसरी ने लिखा बेटे सब ठीक रहा पर आज मेरा आखरी दिन था किसी ने नही बताया और मेरी जगह किसी और को दे कर कहा सुखी रहो........................अभी जंग नहीं लगा इसलिए संग्रहालय में जा रही हूँ। आराधना राय अरु

पुकारा है

दर्द ये गम ए दिल का आखिरी सहारा है दर्द से जीवन को हमने हर- पल संवारा है मेरे इन लबों पे फ़िर ज़िक्र अब तुम्हारा है साँस - साँस कहती है दिल से दिल हारा है हाथ में लहू देखकर तुमने सोचा कातिल है काम कर गयी रोशनाई वो सितम हमारा है दोस्त से वफ़ा कर ली दुश्मनी हजार की है जां से मेरी जान लेकर किसने अब पुकारा है आराधना राय "अरु"

अतुकांत

साभार गुगल अतुकांत विश्वास के छोर होते है एक छोर तुम्हारे हाथ में होगा जो कही राह में छुटगया होगा एक छोर मेरे हाथ में साथ बन कर चल रहा है विश्वास का कुछ अगर टुटा सा मिले तो समझना दिल था मेरा क्युकी क्योकि विश्वास की डोर में दिल ही बंधे होते है जो टूट जाए दिल होते है विश्वास नहीं टूटते आराधना राय अरु

सुबह से पहले

.शाम धुंधली हुई जाती है.  सुबह से पहले रात आई है तेरा मिलना न मिलना इतफाक सा रहा होगा वरना गेरों का होसला इतना  बढ़ गया होता रात आयगी चुन लेगी अपनी नज़र से तुम्हे मैं सुबह सी तेरे द्वार पर नज़र आ जाउंगी काश ये ज़िन्दगी मेरी  वफ़ा  का इनाम  होती दूर से तेरेआने की सदा तुझ से पहले जाना लेती  मन का दीप जला कर  बुझा देता है यहाँ कोई हम शमा के आसरे ही तकदीरी बना  बैठे है नूर मंदिर का हो या मस्जिद  या गिरजे का लो तो लौं है वो रोशनी कर के ही कही जाएगी आराधना राय 'अरु'