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सुबह से पहले


.शाम धुंधली हुई जाती है.
 सुबह से पहले रात आई है

तेरा मिलना न मिलना
इतफाक सा रहा होगा

वरना गेरों का होसला
इतना  बढ़ गया होता

रात आयगी चुन लेगी
अपनी नज़र से तुम्हे

मैं सुबह सी तेरे द्वार
पर नज़र आ जाउंगी

काश ये ज़िन्दगी मेरी 
वफ़ा का इनाम  होती

दूर से तेरेआने की सदा
तुझ से पहले जाना लेती 

मन का दीप जला कर 
बुझा देता है यहाँ कोई

हम शमा के आसरे ही
तकदीरी बना  बैठे है

नूर मंदिर का हो या
मस्जिद  या गिरजे का

लो तो लौं है वो रोशनी
कर के ही कही जाएगी
आराधना राय 'अरु'

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आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

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