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नज्म याद आता है


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साभार गुगल




सुबह होते ही तू याद आता है
ए जालिम तू कितना सताता है

ना मिला वो कोई रंज नहीं
उसका दुख रह रह के बताता है

यूँ तो मेरा वो लगता कोई नहीं 
उसका मेरा सदियों का नाता है


ना मिला वो कोई रंज नहीं
उसका दुख रह रह के बताता है


आराधना राय

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श्रद्धांजलि

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आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"