Skip to main content

श्रद्धांजलि

Image result for flowers

मेरा बचपन ही साथ लें गए
पिता मेरे तुम ईश्वर हो गए
मेरे जीवन के वातायन बन
मुझे अपने सपनें भी दें गए
मुझे नव जीवन यू  देने वाले
सागर तीरे ही   पार वो हो गए
इस जीवन से विदा लेने वाले
उस ईश्वर के कण में खो गए

(स्व श्री कैलाश चन्द्र शर्मा
 को नमन ४ बरसीं पर))



Comments

Popular posts from this blog

कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"