Skip to main content

Posts

उम्र गुज़री عمر گزری

साभार गूगल उम्र शिकवे शिकायत में गुज़री बात कहते सारी रात ही गुज़री कौन आग लगता रहा पानी में सहर तो यूँ दामन बचाते गुज़री ग़ुम गए वो सारे ख़्यालात कही जिनको ढूँढ़ते ये ज़िन्दगी गुज़री दुनियाँ तेरे बाजार में सौदाई सही आब आँखों में लिए राह ये गुज़री ये आँसू भी ग़वारा ना हुए ना सही लबों पे हँसी भी 'अरु ' जां से गुज़री आराधना राय 'अरु '                                                                                                                                                                 عمر شکوے شکایت میں گزری بات کہتے ساری رات ہو گزری کون آگ لگتا رہا پانی می...

बात हुई

साभार गूगल कौन जानें क्या कब ये बात हुई तुझ से यूँ ही नहीं मुलाक़ात हुई कहीं जब झूम के गाता है सावन किसकी आँखों से ये बरसात हुई तन पे बारिश कि कैसी छींट पड़ी मन कि अपने आप से ये बात हुई रंग कच्चे होते तो निकल जाते युहीं ताउम्र ना निकले ये अज़ब बात हुई अब के बरसात में हलचल ख़ास हुई घर में "अरु" बिज़लियाँ मेहमान हुई आराधना राय "अरु" Rai Aradhana ©

आज़ादी के मायने

 साभार गुगल आज़ादी के मायने बदलने ज़रूर  चाहिए हमारे अपनों के नज़रिये बदलने  चाहिए   कुछ कर दिखाने का ज़ज़्बा होना चाहिये हालात बदलने का माद्दा होना तो चाहिए अँधेरी रातों को उज़ाले नये फिर चाहिए सोच कि "अरु"  तस्वीर उभरनी चाहिए Rai Aradhana © आराधना राय "अरु "

प्रयाण

हिमालय की चोटी आवाज़ देती है रगों में नया सा ये उन्वान देती है ---------------------------------------------- रातों को जग कर प्रहरी सा वो  अटल रहा जिसका सीना सदा ही देश के लिए सजा जिसका लहु गंगा सा बह कर पवित्र हुआ हे  वीर आर्येवत पर तुम सदा विजित रहो रण में शौर्य -पताका तुम फहराते ही रहो देख आसमां से कोई शत्रु फिर से आए ना कोई चिंगारी दिखा फिर अब भाग पाए ना सज़ग ,धीरता से अब तुम भी प्रयाण करो आराधना राय "अरु"     

रंज़

    रंज़ मेरा था मेरा, मेरे ही साथ रहा उम्र भर आह कि वो ही सौगात रहा दफ़न हो गए होते हम यूँ यहीं कहीं अब के ज़माना भी मेरे ही साथ रहा वो कहे रात तो रात ही बस मेरी सही गमों का सौदा था हमनें  हँस के सहा जानें कौन बिज़लियाँ रोज़  गिराता रहा  ज़मी पे "अरु"अजब सा  कुफ़्र  ढाता रहा आराधना राय "अरु " Rai Aradhana © ---------------------------------------------------------------- कुफ़्र =attitude of ingratitude and thanklessness मतलबी ,ज़िस पर ईश्वर कि   कृपा ना हो                                                                            

आसान है

कितना आसान है दामन छुड़ा लेना  दूसरों पे हँस  के हर पल बीता लेना किसी की चाहतों से खेलते ही रहना किसी की उम्मीदों पे पानी फेर देना खिलवाड़ कर दिलों  को बहला लेना  ज़ख़्म  पे घाव  सा कर हंसते  रहना  आसान है दिलों से यू  खेलते ही रहना ख़ुद को ख़ुदा सा "अरु" बोलते ही रहना आराधना राय  "अरु" Aradhana ©                             

चुभन

सलीक़े  से उठे बैठे बुज़ुर्गो की ये सब  हिदायत थी करीने से संभाले घर माँ की उम्र भर ये ताक़ीदें  थी नज़रों  को झुका ही घर से वो बाहर ही निकली थी कोई शीशा था चुभा ऐसा की मेरी जां ही निकली थी लबों पे मुस्कराहट ऐसी कि दिलों को बहलाती थी बड़ी ही कैफियत दे कर ख़ुद को सम्हाल लेती थी न जाने क्यों गुलिस्तां को फिर किसी ने उजाड़ा था माँ के आंसुओ  ने रो कर दिल को फिर सम्हाला था ना मालूम क्यूँ  माशरा ये  दुख्तर को ही यूँ रुलाता है लड़कों को माशरा "अरु " कब  ये सबक़ सिखलाता है आराधना राय "अरु" -------------------------------------------------------------- माशरा- society , समाज़  दुख्तर - girl  , लड़की  चुभन 

गुल

गुलों से ना पूछ तू  यू ही  मुस्कुराने का सबब उन की फ़ितरत ही कुछ ऐसे नसीब की होती है फिज़ा उन से महके बस ये  ख़्वाहिश है उनकी चंद लम्हों में उनकी ये हसरत भी पूरी होती है सबा हँसा कर जाती है ये मालूम है उनको  भी एहसास के लम्हों कि उम्र "अरु " कम होती है आराधना राय  "अरु" Aradhana ©     ----                      ------------------------------------ सबा - breez , हवा   

श्रद्धांजलि

मेरा बचपन ही साथ लें गए पिता मेरे तुम ईश्वर हो गए मेरे जीवन के वातायन बन मुझे अपने सपनें भी दें गए मुझे नव जीवन यू  देने वाले सागर तीरे ही   पार वो हो गए इस जीवन से विदा लेने वाले उस ईश्वर के कण में खो गए (स्व श्री कैलाश चन्द्र शर्मा  को नमन ४ बरसीं पर))

क्या बताए तुझे

क्या बताए तुझे  ----------------------------------- मेरी ज़िन्दगी के   हालात तंग थे  इसलिए मेरे रिश्तों  कि मौत हो गई।  ज़िंदगी में नाकाम रहे  रिश्ते भी हम पे कुछ  बोझ ही रहे।  मेरी चादर  ही तंग थी  लेना -देना ना कभी  सलीक़े से आया हमें  मुझ से मेरे रिश्तों को  परेशानी यही थी , दिल कि दौलत की  मेरे पास यू तो कमी  नहीं थी।  दुनियाँ का कारोबार  जिस से चलें वो  दौलत नहीं थी।  ख़्वाब है उन कि  क़ीमत  ही क्या है  मेरी नाकामियों में वो भी अब बिकते नहीं कहीं। क्या बताए तुझे ज़िंदगी रिश्तों के साथ ही नहीं  चल पाए हम कभी। आराधना राय  "अरु" Aradhana ©    

रूह

रूह प्यासी रही सदियों तक दिल की ज़मी थी दरकती रही कौन था जिससे हम यू पूछते आईने को क्यू  बहलाते  ही रहे ख़्वाब थे जो आँखों को भाते रहे नींद में "अरु" कसमसाते ही रहे आराधना राय "अरु "

ना बिकना आया

                     ना बिकना आया  -------------------------------------------- लोग बिक जाते है बस पल -दो पल में ही   हमें ना इस तरह बाज़ार में बिकना आया  राह चलतों से बात क्या हम अपनी यू करें   जिन्हें नज़रिया भी ना बदलना कभी आया  अपने ख्वाबों को उम्मीदों के सर ही करते है रोज़ सिक्कों कि तरह हमें ना बदलना आया   वो खुश रहे उन्होंने बेंच दी दूसरों कि भी अना  हमकों दूसरों कि बर्बादियों पे ना हँसना आया  आराधना राय  --------------------------------------------------- अना --स्वाभिमान ,   

तक़दीर

एक दिन उसे खुद से मांग लेता तक़दीर जो वो खुद बना गर लेता वो मुझे उस का पता क्या यू देता एक हँसी थी जो वो उधार यू लेता उसकी जानिब से उठा था रंज़ लेता हादसा कम न था  "अरु"  सह वो लेता आराधना राय   "अरु" Aradhana © 

बेवज़ह

जाने कौन बात कर गया था कहीं कैसा वादा था कर  गया था कोई बेवज़ह ही सताता रह गया था कहीं ख़ुदा भी मुस्कुरा कर रह गया कोई वो कौन था तेरे मेरे दरम्यां ही कहीं  हर बात पे  रंज सताता रहा यू कहीं  परखा हर कसौटी पे ज़माने ने कहीं  मेरी अना ही टूटी उस परख में कहीं  बड़ी हसरतों का ज़नाज़ा उठा यू कहीं  खाक़ कर  "अरु" बातें बनाता रहा कहीं  आराधना राय  Aradhana ©  ------------------------------------------------ बेवज़ह- Meaning less. बिना बात  अना- -Self- respect,  स्वाभिमान  दरम्यां- middle/midst/interval, in-between" in ... बीच में     तेरी मानिंद ही है, झील सा गहरा नफ़ासत वाला  इस ज़माने से ही अलग सा  कहीं वो दिखने वाला 

आवाज़

नाकाम उम्मीदो का ज़नाज़ा लेकर  हसरतों को हम क्यू यू ढूँढ़ते ही रहे  बड़ी खामोशियाँ थी तेरे ही शहर में  कौन सा शोर था जिसे झेलते ही रहे  नादानियों के शहर में बर्बादी ये हुई  आवाज़ थी सभी कि जी तोड़ती रही शीशे तमाम टूट गए मेरे ही मकान के  कौन सी शये थी"अरु" भटकती ही रही आराधना राय   Rai Aradhana ©   

छवि

सुन्दर छवि किसने यू ही गढ़ी यहाँ किस कि निशानी रह गई बीते हुए युग कि कहानी कह गई अनजाने से बोल कह चुप हो गई कवि कि कल्पन साकार हो कहीं "अरु"स्वप्न बुन कर वो रह गई आराधना  राय Rai Aradhana ©

नज़्म -जंग सरहदों की

नज़्म -जंग सरहदों की  ------------------------------ ज़ख़्म एक माँ ने भी खाया होगा  दिल उसका भी तो टूटा  ही होगा  बाप कि रूह भी कांप गई यू होगी  कंधो पे जब बेटे को उठाया होगा  किसी के सपने मरे सरहद पे कहीं कहीं तो  आँख में आँसू आया होगा शहीद  कह कर ही पुकारेगा ज़माना  आसमां में कहीं वो मुस्कुराया होगा   गोलियाँ चलती रहेंगी  सरहदों पे यू  कोई उनका भी निशाना बनता होगा  जंग कि कैफ़ियत नहीं होती है कहीं  जो चलाई गई साध कर ही निशाना  ऐसी गोलियों का धर्म होता है कहीं  नहीं ये जानती है हिन्दू , मुसलमान  इनकी भी सरहदे होती है क्या कहीं  करुँ किस बात का ज़िक्र तुझसे "अरु " जंग कैसी भी हो  कोई बेहतरी नहीं होती   आराधना राय   Rai Aradhana ©

अफ़साना

किसका इंतज़ार था तुझे  भी यू ए दोस्त वह कहकशां भी अपने ही साथ ले के गया दामन में सिर्फ़ आँसू थे उसकी ही याद के बीते हुए पल कि वो हर ख़ुशी भी ले के गया ना जाने किस बज़्म  में तुझे वो अब मिले वो जाते हुए "अरु "अपनी दास्ताँ कह गया आराधना राय "अरु"  Rai Aradhana © ------------------------------------------------------ शब्द के अर्थ  बज़्म  -महफ़िल , Gathering   कहकशां - "Highest place" प्यारा , ब्रम्हांड ,   दास्ताँ - story , अफ़साना

ज़ुबाँ

दर्द खुद एक ज़ुबाँ बन जाता  है ख़लिश कि दास्ताँ कह जाता है कोई तुम सा जो यू मिल गया है कोई अब्र का टुकड़ा ही जुड़ गया है मेरी पेशानी पे कुछ वो लिख गया है ख्वाहिशों कि निशानी "अरु" दे गया है आराधना राय "अरु"  Rai Aradhana © (खलिश) Origin: Persian Khalish is an Urdu word, it means "prick, pain, anxiety, apprehension"  हिंदी - दर्द , पीड़ा     पेशानी  -   माथा ,   forehead.-