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पास तेरे हूँ

                                                                 पास तेरे हूँ   ------------------------------------------------------------ मेरी आँखों में हो तुम  दिये की लौ की  तरह तेरे आँगन में लौटी हूँ मैं भी तुलसी कि तरह मुझे माथे पे ना लगाना तुम चंदन कि तरह तेरे पास नहीं हूँ में किसी भी बंधन कि तरह मेरी आखों  में सजोगे  तुम अंजन कि तरह मेरे हाथों में सजोगे तुम भी कंगन कि तरह हीरा ना समझना जली हूँ  कोयले कि तरह मेरे पारस तुम ही सम्हालों यू ही कंचन तरह लौ बन के जलूँगी तुम्हारी ही संगनी कि तरह वो चलती रही "अरु" मन से भी मीरा कि तरह आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

हम सनम

  --------------------------------------- तेरा हर बात गवारा है हमें तेरी चुपी ही ने मारा है हमें मृग तृष्णा अब कहाँ रहेंगी नाव नदियाँ में ही जो बहेंगी तेरी जीत पे  हँस के जीते हम तेरी हार पे भी यू हारे बस हम थाम जीवन कि पतवार फिर ले चल माँझी नाव पार फिर यू तुम संग  ये प्रीत लगा हम हारे है सब कुछ "अरु"  सनम आराधना राय

पिया संग प्रीत

--------------------------------------------- पिया तुम संग प्रीत ही अजब यू रचाऊँ मीरा कान्हा कि हो यू जब हो ही जाऊँ कहीं राधा बन कृष्णा का साथ निभाऊँ मीरा बन कृष्णा के पास क्यों ना जाऊँ अँखियों में सपनें भी उन के अब पा जाऊँ तुम्हें कैसे बिसर यू अब "अरु" कहीं जाऊँ आराधना राय 

कह जाते हो

आँखों से कौन सी बात कह जाते हो दिल में कहीं तुम समाते ही जाते हो तुम अपने नाम के दिये से जलाते हो होठो पे इक मुस्कान बन छा जाते हो मेरे आँसू भी तुम पी कर चले जाते हो "अरु" को संसार तुम देने चले आते हो आराधना राय

पीड सी

पात पात पर इठलाती प्रहरी भोर हो कोई सुनहरी तुम भोर हो पहली किरण कि और मैं ढलती साँझ सी कर रही नव किसलय स्वादन प्रथम रंगिणी विभोर सी मैं सूर्ये नहीं ना  हूँ रत्नाकर हूँ सूर्ये कि पीड सी                                                                                                                                                                   तिमिर को सह कर  ह्रदय में चंद्र कि विभा सी  मिटा कर आलोक में स्वयं को  बनी  नव गीत सी तुम जीवन के प्रयाण का प्राण मैं अंत हूँ सुरभि सी छेड़ती है राग-प्रेम बन  "अरु" का ...
             चली आएगी  ==================== चुप चाप एक दिन चली आएगी  उदास  चेहरे पे हँसी भी  आएगी  ज़िंदगी के नए फ़लसफ़े सुनाएगी  दास्ताँ अपनी भी वो सुना जाएगी  आँखों के फ़साने तुझे भी सुनाएगी  एक दिन चुप चाप चली वो जाएगी  शाम ना कोई फ़िर आज सी आएगी  वो चुप चाप आई थी चुप ही जाएगी  ग़मों का सौदा कर खुशी दे जाएगी  ये "अरु" भी  हज़ार बात कह जाएगी  आराधना राय 

बाबूल

बाबूल --------------------------------------------------------- बचपन में तेरी उंगली को जब यू थाम चली थी डगर उसी दिन से ये लंबी पहचान ही चली थी तेरी बाहों में आ कर देखा ये पूरा ही संसार मैंने बाबूल तेरे आँगन कि वो ही नन्हीं सी कली थी तेरी बातों ने मेरी जुंबा को नए से शब्द ही दिए थे जीवन से पहचान उसी दिन ही जा कर तो हुई थी तेरे बिन अश्रु धारा कितनी यहॉ यू बहा कर चली हूँ बगैर धुप का पौधा ही हूँ पेड़ मैं कब बन ही सकी हूँ तेरी हर बात को आज भी मन में यू बसाए हुए हूँ कठिन से जीवन कि डोर "अरु " ये भी थाम चली हूँ आराधना राय
क्या कहिये  ------------------------------------------------    जिन कि फ़ितरत ही यू पत्थर से  मारने कि हो   प्यार कि बातें भी उन से अब यू  क्या कहिये  ज़ज़्ब कर रख ले बादल जब यू कोई आब ही ना बरसने वाली उस बरसात का क्या कहिये  तिश्नगी है इश्क़ कि यों बढ़ती ही ये तो जाएगी  रूह प्यासी रही ज़ज़्बात कि "अरु" क्या कहिये   आराधना राय  कोई रूह पुरानी  होगी कहीं , दिल कि वादियों ने पुकारा होगा कहीं  

कहाँ

                                कहाँ   --------------------------------------------------------------------- मेरे  चेहरे कि गढ़न भी याद होगी अब उसे कहाँ   उस का वास्ता मुझ से यू भी ऐसा भी रहा ही कहाँ वक़्त जब  चला  जाता है कोई रोक पाता है कहाँ बीतते लम्हों में कैद ये  जिस्म यू रह पाता  कहाँ ढूँढते फिरे जिसे जीने के लिए वो मिला ही कहाँ अनजान सी यादें थी "अरु " कोई जीया ही कहाँ आराधना राय 

गुज़रा

गुज़रा  ------------------------------------------------------------------------------------ वक़त निकला बहलने बहलाने में जैसा भी गुज़रा रेत पर जैसे यू ही वो हँस कर अभी अभी ही गुज़रा वो मेरी दिल कि राह गुज़र से हो कर जब भी गुज़रा वो मेरे जिस्म को नहीं मेरी  रूह को छू कर ही गुज़रा वो यू  करता रहा डूब कर दूर से प्यार कुछ यू मुझको  ठंडी फुहार सा दिल पे यू ही वो  दस्तक दे कर गुज़रा वो यू ही  करता रहा  दूर से बस  प्यार कुछ  मुझको ठंडी हवा का झोंका सा वो  दिल से ही हो  कर गुज़रा उसकी आँखों से देखती हूँ सारा ही ये अनछुआ ज़हान अधूरा फ़साना थी "अरु" वो मुझे मुकम्मल कर गुज़रा आराधना राय 

बारात चली थी

बारात चली थी  ----------------------------------------- वो हाथों कि मेंहदी दिखाते है  हमारे दिल को क्यू खूँ में नहलाते है  उसकी आंखों में सिर्फ लाली थी  वो किसी और कि हमेशा जो होने वाली थी  सब ने लाल जोड़ें में सजे देखा  उस के दिल के दर्द को किसी ने ना देखा था  तमाम खुशियों कि बारात सजी थी  बड़ी ख़ामोशी से इश्क़ कि अर्थी सजने वाली थी  बडी धूम से डोली उठी थी  किसे पता "अरु " वो लाचारी साथ लेकर चली थी  आराधना राय 

पहचान लेगा

-------------------------------------------------- मेरा  दिल  तुझे भी यू ही कही  ढूँढ लेगा  तेरी आहट को दूर से सही , पहचान लेगा  गुमशुदा हो दूर जाओ अगर चे तुम कहीं   दुनियाँ का बाजार तुम्हें भी पहचान लेगा  किसी सोच में नहीं रूह में ही थाम लेगा हर बात "अरु" को  निगाहें यार मान लेगा   आराधना राय 

बन जाओ

बन जाओ ------------------------------------------- क्यू बस  समझने समझाने पर जाओ अपना सोचा खुद कर भी अब  जाओ   बात अपनी क्या उन से  कहलवाओ  ख़ुदग़र्ज़ हो हाल -ए -दिल क्या बताओ  ,मुस्कुरा कर सह ले गम तू ज़िन्दगी के क्यू अपने गम से उसे रोज़  कहीं रुलाओ  दिये सा मंदिर में जल रौशनी भी फैलाओ प्यार को दिल में यू अपने तुम बसा जाओ किसी के लिए जी कर खुशियाँ ही  बरसाओ प्रेम पूजा है गली में बदनाम क्यू कर जाओ किसी को "अरु" प्रेम  दान कृष्ण बन दे जाओ 

किरकिरी

 हथेली पर पड़ी हर लकीर बदल जाती है सात -जन्मों कि हर बात  बदल जाती है कब ये आंखों के वो ख़्वाब बदल जाती है ज़िन्दगी तू रोज़ हमें यू ही तड़पा जाती है रोज़ नींद में वो बहलाने मुझे आ जाती है कभी हँसती है कभी रुला कर वो जाती है अपने दिल  के दर्द को  वो छिपा जाती है आँख कि किरकिरी "अरु " बता जाती है आराधना राय

मात

                      वक़्त के साथ हालत बदल जाते है                         लोग एक दिन सब को भूल जाते है                       एक हम है बातों को बताये जाते है                       तेरी यादों में दिन भी लुटाये जाते हैं                                           तुझ पे एतबार क्यों  किये जाते है                       बिना ही बात गम को पीये जाते है                                              इस बहाने ज़िन्दगी जीये जाते है           ...

कह जाते हो

आँखों से कौन सी बात कह जाते हो दिल में कहीं तुम समाते ही जाते हो तुम अपने नाम के दिये से जलाते हो होठो पे इक मुस्कान बन छा जाते हो मेरे आँसू भी तुम पी कर चले जाते हो "अरु" को संसार तुम देने चले आते हो आराधना राय 

कमी ना थी

कमी ना थी  ================================================== तेरे शहर में यू तो कुछ कमी ना थी  तेरे बगैर पर मेरे पैरों में ज़मीं ना थी  तुझे  ही ढूँढने राह  में ही निकली थी  तझे दिल कि हालत क्यू पता ना थी   इत्मिनान था हमें कुछ यू कमी ना थी  रौशनी दिल में थी ये ज़मीं ज़मी ना थी  मुराद माँगते क्या जब कहीं कमी ना थी ज़ख़्म दिल मे थे "अरु" शिकायत ना थी   आराधना राय 

रटन

 कौन सी रटन अब  लगाऊँ  मेरे श्याम तुम्हें ही पा जाऊँ  खोल अलकों को बस  अपने  तेरे नाम से उन्हें यू  सजाऊँ  प्रीत कि बंसी सदा सुन जाऊॅ   उर में सदा के लिए बस जाऊँ   "अरु " मीठी तान सुन जाऊॅ  आराधना राय  *alko---kaan

नहीं जानती

नहीं जानती ============================== किस रूप में जन्म लूँगी फिर यह  नहीं जानती हिंदू -मुस्लिम -ईसाई -सिख यह नहीं जानती मेरा -तेरा करने वाले कब थमेंगे नहीं जानती इंसान हूँ ईश्वर को हर रूप में ही हूँ बस मानती कब छीटा कशी छोड़ेगा इंसान ये नहीं जानती औरों के मान को कोई ना डसेगा नहीं जानती किसी धर्म के नाम पर दंगा फिर होगा हूँ जानती इस बार कोई एक इंसान मरेगा इतना हूँ जानती आराधना  राय 

सावरे

छोड़ी जग कि लोक लाज कान्हा कि अब हो लू आज मिलने कि  तू ना छोड़ आस अब तो ना बिसारो मेरे नाथ अरु को संभालो सावरे आज आराधना राय