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कविता तब की जब "अना"नाम से लिखा पर "अना कासिमी से परिचय के बाद जाना की वो भी "अना है तब से मैं "अरु " नाम से लिख रही हूँ पैमाने और पैमानों के ऊपर कसी गई जूनून -ए जंग ऐसा की मौत से लड़ गई कांच के महलों में ,ये दीवानगी हो गई मेरी कहानी हर दरीचे को पता हो गई मैं रूह थी मेरा ना कोई मक़ाम रहा ज़र्रे ज़र्रे , बिखरी और निखर गई देर से जाना, अपने हिज़र का अंजाम सुबह होने तक मैं अपनी ज़बा खुद हो गई क्या कहे "अना" अपनी हम तुमसे खुद रोई मेरी दास्ता और फना हो गई आराधना राय "अरु" Tulika ग़ज़ल ,गीत ,नग्मे ,किस्से कहानियों का संसार

बदल गए

नज़ारे बदल गए किस्मत के सितारें बदल गए कितने चाहने वाले बदल गए जिंदगी के हाथों वक्त के धारें बदल गए बंटवारें में घर मिरा लूट लोग निकल गए आसबाब के साथ घर के लोग बदल गए चाहत के तूफान उठे दिल में देख दरिया के साहिल भी बदल गए रो -रो कर मुझे बुलाने वाले मेरी मईयत उठा कर बदल गए बस्ती दर्द और गम की क्या होती रोतों पे "अरु" मुस्कुरा कर लोग बदल गए   © आराधना राय "अरु"

सच जीवन का

सच जीवन का सोच कर यही पाया ज़िन्दगी तेरे हाथ क्या आया उम्र भर खोजते है जिसको हम बता हाथ कि खाली लकीरों के सिवा क्या पाया एक पल कही खुशियाँ भी खिलौना है और कहीं गमगीन मातम पाया जिंदगी सोच तूने क्या पाया जुल्म करना जिनकी हो फ़ितरत रो कर उन के सामने क्या पाया आराधना राय "अरु"

क्या मिला

उम्र भर का सिला मुझको क्या मिला गुम कर के खयालात तुझको क्या मिला सहारा में जैसे फूल खिला दशत में रो कर क्या मिला रुसवा किया सरेबाज़ार बता तुझको क्या मिला दिल अपना है बेजार गम-ए -दिल बता क्या मिला अपने माज़ी को किया याद बता तुझको क्या मिला हर्फ बिखरे मेरे उसके साथ अरु बता उसको क्या मिला आराधना राय "अरु"

मीरा

साभार गूगल अपने पिया की दर्श दीवानी भई गीत बना कर श्याम को सुनाई आस में पी के सुध बुध गवांई मीरा कृष्ण की दीवानी कहलाई विरहन रैना रो - रो कर बिताई पीड मसि बना आसूँ से लिखाई मीरा जन्म श्याम संग बिताईं श्यामा संग जग में प्रीत बढाई मुख देख पिया का कह ना पाई सोवत- जागत श्याम रटन लगाई जल की मछली जल बिन ना रह पाई "अरु" श्याम में जाकर मीरा समाई आराधना राय "अरु"

आने के बाद

साभार गूगल तेरे जाने के बाद तुझसे गिला नहीं शिकवा,शिकायत आरज़ू ,बाकी नहीं पत्थर है दिल नहीं जिंदगी में जुस्तजू तेरे सिवा कोई नहीं आती बहारें लौट जाए तेरे हसीन मकान से ऐसा कब हो सका है किसी चारागार में जीने के लिए काफ़ी है मेरी टूटी सी झोपड़ी तेर फरेबी वादों से अच्छी है खरी बात नए मरहले अभी है इन मरहलों के बाद आराधना राय "अरु"

पनाहों में होता

साभार गूगल 27-12-2015 सज़दा गर तेरी पनाहों में होता  असर कुछ इन दुआओं में होता मेरा घर रोशनी से आबाद होता इमान गर तेरी वफाओं में होता मंदिर ना मस्जिद ना खाक होता खुदा गर तेरी इन शिराओं में होता दिल का मकान यह खाली ना होता तेरा नाम गर इन सितारों में होता चाँद रात उन का हसीं दीदार होता चेहरा गर उनका ना हिज़ाबों में होता बसेरा अपना तेरे गाँव में "अरु" होता पैगाम तेरा गर इन फिजाओं में होता आराधना राय "अरु"

कहानी- पहचान

कितनी सुंदर कहानी है, कृष्णा ने अख़बार ला कर दिखाया गोविन्द कुछ ना बोला, अनमना हो कर उसने अख़बार एक तरफ रख दिया । तुम भी तो लिखते हो तुम्हारा नहीं छप सकता, मुस्कुरा कर गोविन्द ने कहा छपते है मेरे नाम से उपन्यास पर ऐसे लोगो के जो होते ही नहीं। कृष्णा हँस कर बोली अच्छा मैंने तो नहीं पढ़े, अब इस के बाद गोविन्द क्या कहता...........खुद लिखो और बाद में किसी और के नाम से पढो, कितना अजीब है, आखिर छदम नाम से लिखने के पैसे भी तो मिलते है। आज भी याद है एक कविता लिखी थी, फिर रात भर उसे गुनगुनाता रहा था, नहीं मालूम था कि पहली मंजिल पर रहने वाली कोयल सुन कर लिख रही है। अगले दिन कालेज में कविता हिंदी - विभाग में सम्मिलित करवा दी गई, पर करीब आधे - घंटे बाद मुकेश जी ने बुलाया, गोविन्द अचकचाया हुआ सा जब सामने पहुँचा तब कोयल कि कविता आगे कर मुकेश जी मुस्कुरा दिए," ये कह रही है कविता इस की है" ", दोबारा लिखवा ले इससे अच्छी लिख डालूँगा", गोविन्द ने पास से ही कलम उठाया और कागज़ पर लिखना शुरू कर दिया । दोबारा लिखी कविता पहले से कही ज्यादा अच्छी थी, मुकेश जी चुप रहे, कोयल के ख़िलाफ सबूत ...

हाल ग़ज़ल

    साभार गूगल                                               फूल से सुना नग्मा प्यार का हाल सुना सबा ने इज़हार का --------------------------------------------------------------------------------- लम्हा दर लम्हा गुज़रा तूफान का दिलों के बीच रिश्ता क्या इकरार का --------------------------------------------------------------------------------- शज़र पर आफताब बरसा आग का कितना तवील था मौसम इंतजार का --------------------------------------------------------------------------------- सफर सुहाना रहा घटा से मेहताब का कली ने सीखा तराना दिल के क़रार का --------------------------------------------------------------------------------- ...

एहसास

दिल के एहसास को ज़िया जाता है मुस्कुरा के हर दर्द पिया जाता है ---------------------------------------------------------------------------------  इश्क़ में बदनाम हुआ जाता है  रिश्ता  दिल से निभाया जाता है -------------------------------------------------------------------------------- चोट लगने पे रोकर सो जाता है मासूम दिल जब सताया जाता है --------------------------------------------------------------------------------  दामन में सिमट कर  बता जाता है मेरा अक्स मुझ से  छिपाया जाता है ------------------------------------------------------------------------------- दिल के दर्द का पता बता  जाता है चाँद कि चाँदनी में समाया जाता है ----------------------------------------------------------------------------------  कान्धों पे सर रख अश्क बहा जाता है  ज़िन्दगी तुझ से क्या बताया जाता है ----------------------------------------------------------------------------------------  बात कर ख़ुद हालात पर रो जाता है   इल्ज़ाम  "अरु " ...

मन की भूमि

मन की भूमि ------------------------------ उपज रहा मन की भूमि पे विप्लव अंकुर का ही धान किस पे बाड़ लगा रोकोगे कैसे बचा पाओगे सम्मान ----------------------------------------- भूखा पेट राम ना क्या जाने रवि और रंजन की बात यहाँ कोडी और छदाम क्या जाने अश्रू बहे, तन का लहू बहे यहाँ -------------------------------------------------- नारी की लज़्ज़ा की बात कहूँ माँ के उधड़े तन को देख कर कौन सा मनुज है जो ये कहे तेरा मुझसे क्या नाता है कहूँ ------------------------------------------------------ बाँझ रहे मन क्या किस से कहे बोझ बेमानी क्यों स्वयं पे धरे तरु उखड़ते भू पर क्या गिरे झंझावातों से जो प्रतिदिन लड़े आराधना राय "अरु" 

रह जाएगी

साभार गुगल हम रहे या ना रहे बस दीवानगी रह जाएगी हौसले मिट भी गए तो जुस्तजू रह जायगी कल मिलेगे काट कर दुनियाँ के हर सितम मजबूरियाँ ऐसी बड़ी की हम फ़ना हो जायेगे 

मेरी सांसों में

साभार गुगल तुम बसें हो मेरी सांसों में  मेरी धड़कन में तुम समाए हो  ------------------------------------------- मैं थरथरा रही हूँ लों की तरह तुम मेरे साथ -साथ जलते हो ------------------------------------------- गुम रह कर देख ली दुनियाँ सारी तुम मेरी साँस साँस में महकते हो ----------------------------------------------------- तेरे संग रह कर पा लिया है तुझे तुम मेरे रोम- रोम में बसते हो ------------------------------------------------- मेरी नज़रों में धुंध सी रहती है तुम किसी धूप सा मुस्कुराते हो -------------------------------------------------- तेरे कदमों में ज़माना आ गया है "अरु"तुम साया बन कर उभरते हो आराधना राय "अरु"

गुजरता है

 साभार गुगल गुजरता है ----------------------------------- उनकी गलियों से अब  गुजरता है रूह की वादियों से जब गुजरता है सोंधी मिट्टी की कसक है यादों में मन बावरा  प्यार में अब बहकता है तेरा अक्स बादलों में अब दिखता है रूप का सागर  बन जब छलकता है वादा उमर भर का  कोई नहीं करता है हादसों से हर कोई कब यहाँ उभरता है छोड़ दिया सारा हमने रिश्ता-ए जहान दर्द का काफ़िला जब कोई चलता है उनकी आँखों से नूर बन कर  बहा मन का उमंगो भरा जब संवरता है मेरी हाथों में लिख कर इबारत सी "अरु" कोई अश्क बन पिधलता है आराधना राय "अरु"

चन्द आश्यार

चन्द आश्यार ---------------------------------------------------------- उम्मीद के जहाँ में रहते है हम कुछ सुनो तुम कुछ सुने हम मरकस कि बयानी है सुनो तुम चहरे पर नादानी है कुछ सुनो तुम हम नहीं है शामिल कुछ सुनो तुम रस्मों में बेईमानी है कुछ सुनो तुम आराधना राय "अरु"

विश्व- मैत्री

------------------------------------------- स्रृष्टि , जब भक्ति बन गई जगत जलचर सभी शुभ हो जायेंगे  राम कि अयोध्या , जीवन हो जाएगे श्याम और राधा का प्रेम यही पायेगे विश्व जब सद भावना के लिए विश्व -बंधुत्व दिवस बन जाएगा कोई एक दूसरे से अलग कैसे रह पायेगा गायन , वादन , नृत्य से कला देवी शारदा कोजब पाएगे राम -राज्य बन साकेत सा जीवन यही हो जायेगा प्रेम कि धारा ,सूर्ये कि शक्ति भी आएगी जब जीवन तू स्वयं शिव सार्थक हो जायेगा तब पार्वती को शिव राधा को कृष्ण पाकर गणेशं कि मंगल कामना से हर घर जगमगाएगा उस दिन ईश्वर तू धरती पर उत्तर आएगा जीवन उन्नत शिखर हो जायेगा। पूर्ति स्वयम ईश्वर वसुंधरा का हो जाएगा स्त्री- पुरुष से ,सृष्टि करेगी,अपना श्रिंगार जीवन निरंतर धीरे धीरे आएगा ,सुर का सुरेश्वर ,महेश्वरि भी अपनाएगा "अरु " का जीवन सुरभित हो जाएगा आराधना राय Like Comment Share

पूजा करने वालों को

कविता ------------------------------------ कब तक साहित्य की पूजा करने वालों को फुटपाथ मिलेगा -------------------------------------------- जीते जी ज़लने वालों को केवल भूखा पेट मिलेगा -------------------------------------------------- धरा की बेटी को कब तक सामाजिक अपमान मिलेगा ---------------------------------------------------- नव- सृज़न करने वालों को केवल क्या बाज़ार मिलेगा ---------------------------------------------------------- सूर्य परिक्रमा करती धरती को कभी व्योम का साथ मिलेगा ---------------------------------------------------------- नारी- का अपमान कर चुके पुरुषों को ईश्वर सम पूज कर सम्मान मिलेगा ----------------------------------------------------------- मुरझाए फूलों को क्या इस जीवन में जीने का अधिकार मिलेगा ---------------------------------------------------------- पाखंड करते लोगों को केवल अब भ्रमित संसार मिलेगा --------------------------------------------------------- हाथ कटोरा भीख मांगती इस दुनियाँ को क्या ईश्वर तेरा साथ मिलेगा -----------------------------------------------...

तुम्हें महसूस करना

साभार गुगल तुम्हें हर पल महसूस करना अपनी हथेलियों में भरना चाँद के टुकड़े में भीगों कर माथे पर सजा कर रखना साथ तुम्हारें हर पल रहना माना तुम हो मेरा गहना सूरज को मान कर गहना किरणों की ऊष्मा को पहना तेरीआभा को लगा कर सीने तुम्हें अपना कर साथ चलना आराधना राय "अरु" 

साहित्य श्याम-saahityshyam: आखिर कौन हैं हम....डा श्याम गुप्त

साहित्य श्याम-saahityshyam: आखिर कौन हैं हम....डा श्याम गुप्त द्वारा लिखे लेख पर टिपण्णी सकारात्मक शक्ति देव और प्रयोगामक प्रकृति के लोग योगी कहलाये ---- बुधि और बल प्रयोग को समर्थ रूप से ना स्वीकार करने वाले लोग विध्वंसकारी असुर कहलाये, आप का लेख सोचने को मजबूर करता है,और मुझे याद आ गया 1989 के मोहनजोदड़ो के ऊपर किए गए  शोध पत्र डॉ डी,एन पंन्त के साथ किया गया काम.आप का लेख वैचारिकता के साथ पुराण और वेदों की ऋचाओ की बातें करता है.

ज़माने बदल गए

साभार गुगल मेरे तेरे अब वो ज़माने बदल गए लोगों के आजकल फसाने बदल गए ---------------------------------------------------------- बदहालियों के जुर्म से कैसे निकल गए रोजी की दौड़ में कितने तराने बदल गए ----------------------------------------------- आँखों में जाने कितने शरारे मचल गए ए- आसमां तेरे सारे नज़ारे बदल गए -------------------------------------------------------- ज़मघट लगा कर लोग कितने निकल गए मिलने मिलाने में कितने ज़माने बदल गए --------------------------------------------------------------- रोशनी को देख कर परवाने जल गए उम्मीद के गाँव से दीवाने बदल गए ---------------------------------------------------------------- फाका परस्ती में जितने दिन निकल गए वक़्त के धारे में कितने चेहरे बदल गए ---------------------------------------------------------------------- आसमां के नाम पर "अरु" सितारे बदल गए गुम चाँदनी हो गई झिलमिल नजारे बदल गए आराधना राय "अरु"