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साहित्य श्याम-saahityshyam: आखिर कौन हैं हम....डा श्याम गुप्त

साहित्य श्याम-saahityshyam: आखिर कौन हैं हम....डा श्याम गुप्त द्वारा लिखे लेख पर टिपण्णी
सकारात्मक शक्ति देव और प्रयोगामक प्रकृति के लोग योगी कहलाये ---- बुधि और बल प्रयोग को समर्थ रूप से ना स्वीकार करने वाले लोग विध्वंसकारी असुर कहलाये, आप का लेख सोचने को मजबूर करता है,और मुझे याद आ गया 1989 के मोहनजोदड़ो के ऊपर किए गए  शोध पत्र डॉ डी,एन पंन्त के साथ किया गया काम.आप का लेख वैचारिकता के साथ पुराण और वेदों की ऋचाओ की बातें करता है.

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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

मेरा बचपन ही साथ लें गए पिता मेरे तुम ईश्वर हो गए मेरे जीवन के वातायन बन मुझे अपने सपनें भी दें गए मुझे नव जीवन यू  देने वाले सागर तीरे ही   पार वो हो गए इस जीवन से विदा लेने वाले उस ईश्वर के कण में खो गए (स्व श्री कैलाश चन्द्र शर्मा  को नमन ४ बरसीं पर))